
नई दिल्ली, 21 मार्च (केएनएन) बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और अस्थिरता के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के केंद्रीय बोर्ड ने वित्तीय बाजारों पर भू-राजनीतिक विकास के प्रभाव की समीक्षा की है।
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में पटना में आयोजित अपनी 622वीं बैठक में, बोर्ड ने उभरते वैश्विक और घरेलू आर्थिक परिदृश्य का आकलन किया, जिसमें मुद्रा, मुद्रास्फीति और वित्तीय स्थिरता पर भूराजनीतिक तनाव के प्रभाव भी शामिल थे।
यह समीक्षा बढ़े हुए वैश्विक तनाव की पृष्ठभूमि में आई है, जिसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है, अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ी है और भारतीय रुपये पर दबाव पड़ा है। मार्च में रुपया लगभग 3 प्रतिशत कमजोर हुआ और डॉलर के मुकाबले लगभग 93.72 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया।
आरबीआई ने नोट किया कि ये घटनाक्रम मौद्रिक नीति दृष्टिकोण के लिए चुनौतियां पैदा कर सकते हैं, खासकर बाहरी मुद्रास्फीति के दबाव के बीच कम ब्याज दर प्रक्षेपवक्र को बनाए रखने में।
बैठक के दौरान, बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आरबीआई के बजट को भी मंजूरी दे दी और 2026-29 की अवधि के लिए मध्यम अवधि की रणनीति फ्रेमवर्क ‘उत्कर्ष 3.0’ को मंजूरी दे दी।
विचार-विमर्श वैश्विक विकास और भारत के वित्तीय बाजारों और व्यापक आर्थिक स्थिरता पर उनके प्रभाव की बारीकी से निगरानी करने पर केंद्रीय बैंक के फोकस को रेखांकित करता है।
(केएनएन ब्यूरो)

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