
नई दिल्ली, 27 दिसंबर (केएनएन) भारतीय रिजर्व बैंक ने एआई (फ्री-एआई) के जिम्मेदार और नैतिक सक्षमता के लिए एक रूपरेखा विकसित करने के लिए आठ सदस्यीय विशेषज्ञ समिति की स्थापना करके वित्तीय क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को विनियमित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
समिति का नेतृत्व आईआईटी बॉम्बे के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर पुष्पक भट्टाचार्य करेंगे।
इस उच्च स्तरीय समिति को एक व्यापक और अनुकूलनीय एआई ढांचा तैयार करने का काम सौंपा गया है जो वित्तीय सेवाओं में एआई के वर्तमान वैश्विक और घरेलू अपनाने का आकलन करेगा।
पैनल दुनिया भर के वित्तीय क्षेत्र में एआई कार्यान्वयन के लिए नियामक और पर्यवेक्षी दृष्टिकोण की भी जांच करेगा।
समिति के कार्यक्षेत्र का मुख्य फोकस एआई से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान करना और मूल्यांकन, शमन और निगरानी ढांचे की सिफारिश करना शामिल है।
ये सिफारिशें बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, फिनटेक फर्मों और भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों सहित विभिन्न वित्तीय संस्थानों के लिए अनुपालन आवश्यकताओं को स्थापित करेंगी।
समिति के सदस्यों की विविध विशेषज्ञता मौजूदा कार्य की जटिलता को दर्शाती है। पैनल में रिजर्व बैंक इनोवेशन हब से देबजानी घोष, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर बलरामन रवींद्रन और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह शामिल हैं।
अन्य सदस्यों में ट्राइलीगल से राहुल मथान, एचडीएफसी बैंक के मुख्य डिजिटल अनुभव अधिकारी अंजनी राठौड़, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के सुरक्षा एआई अनुसंधान प्रमुख श्री हरि नगरालू और आरबीआई के फिनटेक विभाग के मुख्य महाप्रबंधक सुवेंदु पति शामिल हैं।
समिति को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अपनी पहली बैठक से छह महीने की समयसीमा दी गई है, जिसमें भारत के तेजी से विकसित हो रहे वित्तीय क्षेत्र में एआई कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देश स्थापित करने की तात्कालिकता पर प्रकाश डाला गया है।
रूपरेखा का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्तीय संस्थान परिचालन दक्षता और सुरक्षा बनाए रखते हुए जिम्मेदार और नैतिक तरीके से एआई प्रौद्योगिकियों को अपनाएं।
(केएनएन ब्यूरो)

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