SC ने मध्यस्थता पुरस्कार पर बिना शर्त रोक लगाने के बॉम्बे HC के आदेश को पलट दिया

SC-ने-मध्यस्थता-पुरस्कार-पर-बिना-शर्त-रोक-लगाने-के SC ने मध्यस्थता पुरस्कार पर बिना शर्त रोक लगाने के बॉम्बे HC के आदेश को पलट दिया


नई दिल्ली, 26 नवंबर (केएनएन) सुप्रीम कोर्ट ने पॉपुलर कैटरर्स को 4 करोड़ रुपये के मध्यस्थ फैसले पर बिना शर्त रोक लगाने के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को पलट दिया है और फैसला सुनाया है कि यह मामला ऐसी असाधारण राहत को उचित नहीं ठहराता है।

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि किसी मध्यस्थ पुरस्कार के निष्पादन पर बिना शर्त रोक केवल दुर्लभ परिस्थितियों में ही दी जा सकती है।

लाइफस्टाइल इक्विटीज सीवी और अन्य बनाम अमेज़ॅन टेक्नोलॉजीज इंक में अपने हालिया फैसले का जिक्र करते हुए, न्यायालय ने बिना शर्त रोक देने के लिए संकीर्ण आधार को दोहराया।

इस तरह की राहत की अनुमति केवल तभी दी जाती है जब पुरस्कार अत्यधिक विकृत हो, पेटेंट अवैधताओं से भरा हो, चेहरे पर अस्थिर हो, या जब समान प्रकृति के असाधारण कारण स्थापित हों।

यह मामला मुंबई के ट्यूलिप स्टार होटल में खानपान सेवाओं के लिए पॉपुलर कैटरर्स और मेपल लीफ एंटरप्राइजेज एलएलपी के बीच 2017 के एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) से उठा, जिसके तहत कैटरर ने सुरक्षा के रूप में 4 करोड़ रुपये जमा किए।

यह व्यवस्था जल्द ही ध्वस्त हो गई जब मुंबई उपनगरीय कलेक्टर ने होटल को कार्यक्रमों की मेजबानी करने से प्रतिबंधित कर दिया। 2022 में, मध्यस्थ ने मेपल लीफ के प्रमोटरों को ब्याज सहित राशि वापस करने का निर्देश दिया।

मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के तहत एक चुनौती के बाद, बॉम्बे उच्च न्यायालय ने याचिका स्वीकार कर ली और पुरस्कार राशि की वसूली को रोकते हुए बिना शर्त रोक लगा दी। इसके बाद पॉपुलर कैटरर्स ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

शीर्ष अदालत ने माना कि मामले में धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार के आरोप शामिल नहीं हैं, जो मध्यस्थता अधिनियम की धारा 36(3) के दूसरे प्रावधान के तहत बिना शर्त रोक के लिए विशिष्ट वैधानिक आधार हैं।

पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय यह जांचने में विफल रहा कि क्या पुरस्कार देनदार ने ऐसी राहत की गारंटी देने वाला एक ‘असाधारण मामला’ बनाया था।

न्यायालय ने कहा, “यह निर्णय-देनदार का मामला भी नहीं है कि पुरस्कार का निर्माण धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार से प्रेरित या प्रभावित था।”

इसमें कहा गया है कि यह मामला किसी भी श्रेणी में नहीं आता है जो धन डिक्री पर बिना शर्त रोक लगाने को उचित ठहराएगा।

तदनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने पुरस्कार के निष्पादन पर रोक के लिए जमा/सुरक्षा की आवश्यकता को बहाल कर दिया।

(केएनएन ब्यूरो)



Source link


Discover more from जग वाणी

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *