
SSC भर्ती में बड़ा बदलाव: 2026 से लागू हुआ ‘Sliding Mechanism’, जानिए Fix और Float का मतलब
नई दिल्ली: कर्मचारी चयन आयोग यानी Staff Selection Commission (SSC) ने वर्ष 2026 से अपनी भर्ती प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। आयोग ने इसे “Sliding Mechanism” नाम दिया है। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना, ज्यादा से ज्यादा पद भरना और हर साल खाली रह जाने वाली सीटों की संख्या कम करना है। SSC ने इस संबंध में 3 मार्च 2026 को आधिकारिक नोटिस जारी किया है।
SSC के अनुसार, हर साल बड़ी संख्या में ऐसे पद खाली रह जाते हैं, जिन पर चयनित अभ्यर्थी या तो Identity Verification (IV) के लिए उपस्थित नहीं होते या फिर चयन के बाद संबंधित विभाग में जॉइन नहीं करते। बहु-स्तरीय परीक्षाओं में आयोग वेटिंग लिस्ट नहीं रख सकता, इसलिए ऐसी रिक्तियां अगले भर्ती चक्र में भेजनी पड़ती हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए यह नई व्यवस्था लाई गई है।
यह व्यवस्था मुख्य रूप से SSC CGL, CHSL, MTS, Stenographer जैसी परीक्षाओं में लागू की जा रही है। नए सिस्टम के तहत SSC पहले First Round of Tentative Allocation (FRTA) करेगा, यानी पहले चरण में उम्मीदवारों की वरीयता और मेरिट के आधार पर अस्थायी पोस्ट आवंटित की जाएगी। इसके बाद अभ्यर्थियों को SSC के क्षेत्रीय कार्यालय में जाकर Aadhaar Authentication के माध्यम से Identity Verification पूरा करना होगा। इसी चरण में उम्मीदवार को Fix या Float में से एक विकल्प चुनना होगा।
क्या है Fix विकल्प?
अगर कोई उम्मीदवार Fix विकल्प चुनता है, तो इसका अर्थ है कि वह पहली बार मिली पोस्ट को ही अंतिम रूप से स्वीकार कर रहा है। इसके बाद उसे किसी भी स्थिति में आगे अपग्रेडेशन या बेहतर पोस्ट के लिए विचार नहीं किया जाएगा। SSC ने साफ किया है कि Fix चुनने वाला उम्मीदवार अपनी अस्थायी पोस्ट को ही फाइनल मान लेगा। यदि बाद में वह उम्मीदवार जॉइन नहीं करता, तो वह पद अगले भर्ती चक्र में भेज दिया जाएगा।
सरल भाषा में कहें तो Fix उन अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित विकल्प है, जिन्हें मिली हुई पोस्ट पसंद है और जो किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते।
क्या है Float विकल्प?
वहीं Float विकल्प चुनने का मतलब है कि उम्मीदवार अभी मिली पोस्ट पर विचार कर रहा है, लेकिन अगर बाद में उसकी वरीयता सूची में ऊपर वाली कोई पोस्ट खाली होती है, तो उसे उस पर अपग्रेड किया जा सकता है। SSC के अनुसार Float चुनने वाले उम्मीदवारों को एक सिंगल स्लाइडिंग राउंड में मेरिट और वरीयता के आधार पर बेहतर पोस्ट के लिए विचार किया जाएगा।
हालांकि इसमें एक महत्वपूर्ण शर्त भी है। यदि किसी उम्मीदवार को Float के तहत अपग्रेडेड पोस्ट मिल जाती है, तो उसे नई पोस्ट पर जॉइन करना अनिवार्य होगा। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो उसकी पहले वाली और नई दोनों पोस्ट समाप्त मानी जाएंगी।
यही कारण है कि Float विकल्प उन उम्मीदवारों के लिए अधिक उपयोगी माना जा रहा है, जिनकी पोस्ट वरीयता में बड़ा अंतर है और जो बेहतर अवसर के लिए इंतजार करना चाहते हैं।
कैसे काम करेगा Sliding Mechanism?
SSC के नोटिस के अनुसार, पहले चरण में अस्थायी पोस्ट आवंटन किया जाएगा। फिर shortlisted उम्मीदवारों को लगभग 10 दिन की सीमित विंडो दी जाएगी, जिसमें उन्हें संबंधित Regional Director (RD) Office में पहुंचकर Identity Verification कराना होगा और वहीं Fix या Float का विकल्प भरना होगा। जो उम्मीदवार इस अवधि में IV के लिए उपस्थित नहीं होंगे, उन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए Absent माना जाएगा और उनकी किसी भी प्रकार की आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।
इसके बाद SSC उन रिक्तियों की पहचान करेगा, जो IV में अनुपस्थित रहने वाले उम्मीदवारों की वजह से खाली हुई हैं। फिर केवल एक बार स्लाइडिंग राउंड चलाया जाएगा, जिसमें Float चुनने वाले उम्मीदवारों को उपलब्ध रिक्तियों पर मेरिट-कम-प्रेफरेंस के आधार पर अपग्रेड किया जाएगा। इसके बाद आयोग संशोधित पोस्ट आवंटन के साथ फाइनल रिजल्ट जारी करेगा।
SSC को इससे क्या फायदा होगा?
आयोग का कहना है कि इस नई प्रणाली से भर्ती प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और अधिकतम रिक्तियां उसी भर्ती चक्र में भरी जा सकेंगी। साथ ही उम्मीदवारों को उनकी वरीयता के अनुसार बेहतर पोस्ट मिलने का अवसर भी बढ़ेगा। SSC ने इसे candidate friendly initiative बताया है, जिसका मकसद एक ही राउंड में रिक्तियों का बेहतर उपयोग करना है।
अभ्यर्थियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
इस नए सिस्टम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Identity Verification चरण को हल्के में नहीं लिया जा सकता। IV में उपस्थित होना और Fix या Float विकल्प समय पर चुनना अनिवार्य है। SSC ने साफ कहा है कि निर्धारित समय के भीतर IV न कराने पर उम्मीदवार आगे की प्रक्रिया से बाहर हो जाएगा।
अभ्यर्थियों को यह भी समझना होगा कि Fix चुनना सुरक्षित जरूर है, लेकिन इससे भविष्य के अपग्रेडेशन का रास्ता बंद हो जाता है। दूसरी ओर Float बेहतर पोस्ट की संभावना देता है, लेकिन अपग्रेड होने पर नई पोस्ट जॉइन करना अनिवार्य होगा।
JoSAA जैसी काउंसलिंग से मिलती-जुलती व्यवस्था
भर्ती विशेषज्ञों के मुताबिक यह मॉडल काफी हद तक यूनिवर्सिटी काउंसलिंग सिस्टम, खासकर JoSAA के Float विकल्प जैसा है, जहां उम्मीदवार वर्तमान सीट बनाए रखते हुए बेहतर विकल्प के लिए खुले रहते हैं। हालांकि SSC का मॉडल अपने नियमों और सीमाओं के साथ अलग है, क्योंकि इसमें केवल एक ही स्लाइडिंग राउंड होगा और कोई वेटिंग लिस्ट नहीं बनेगी।
आगे क्या?
SSC ने अपने नोटिस में कहा है कि इस व्यवस्था को लेकर एक विस्तृत Standard Operating Procedure (SoP) अलग से जारी की जाएगी। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी भ्रम से बचने के लिए केवल SSC की आधिकारिक वेबसाइट ssc.gov.in पर उपलब्ध नोटिफिकेशन और अपडेट ही देखें।

सफ़दर रज़ा एक सक्रिय पत्रकार हैं, जो जग वाणी हिंदी न्यूज़ पोर्टल में संवाददाता (Correspondent) के रूप में कार्यरत हैं। वे विभिन्न सामाजिक, क्षेत्रीय और समसामयिक मुद्दों पर जमीनी स्तर से रिपोर्टिंग करते हैं।
रिपोर्टिंग के साथ-साथ वे करियर मार्गदर्शन और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर भी लेखन करते हैं, जिनमें पाठकों को व्यावहारिक और उपयोगी जानकारी प्रदान की जाती है। उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और आम पाठकों के लिए सहज रूप से समझ आने वाली है, जो उन्हें एक प्रभावी और विश्वसनीय पत्रकार के रूप में स्थापित करती है।
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