
नई दिल्ली, 2 मई (केएनएन) सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के आदेशों का उल्लंघन करके बार-बार काम से अनुपस्थित रहने के लिए नोएडा के गौतमबुद्ध नगर बार एसोसिएशन के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तीन-न्यायाधीशों की समिति को निर्देश दिया है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि बार एसोसिएशन ने अपने पदाधिकारियों के चार महीने के कार्यकाल के दौरान 15 दिनों से अधिक समय तक हड़ताल की, जबकि इस तरह के कार्यों पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश थे।
दिशा-निर्देश जारी
कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश से एक सप्ताह के भीतर उन दिनों की विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा जब वकील काम से अनुपस्थित रहे।
उच्च न्यायालय की समिति को रिपोर्ट की जांच करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
पृष्ठभूमि
यह मामला वीरेंद्र सिंह की एक याचिका से उत्पन्न हुआ, जिसमें बार एसोसिएशन द्वारा बार-बार अदालती काम के बहिष्कार का प्रस्ताव देने का आरोप लगाया गया था।
न्यायालय ने फैजाबाद बार एसोसिएशन मामले में अपने दिसंबर 2024 के फैसले का हवाला दिया, जिसने उत्तर प्रदेश के सभी जिला बार एसोसिएशनों को कार्य दिवसों पर हड़ताल करने या काम से दूर रहने पर रोक लगा दी थी।
हड़तालों पर दृढ़ रुख
शीर्ष अदालत ने त्वरित परिणामों की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस तरह की हड़तालें न्यायिक कार्यवाही को बाधित करती हैं और वादकारियों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाती हैं। इसने दोहराया कि बार निकायों को पेशेवर अनुशासन और अदालत के निर्देशों का पालन करना चाहिए।
(केएनएन ब्यूरो)

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