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Asaduddin Owaisi का “टीम एम” का दावा: यह दावा कितना सही है?
विश्लेषण, संपादकीय

Asaduddin Owaisi का “टीम एम” का दावा: यह दावा कितना सही है?

“टीम एम” का दावा और भारतीय मुसलमानों की असल हक़ीक़त पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज़ हो गई है। इसी क्रम में बुधवार को Asaduddin Owaisi की पार्टी एआईएमआईएम और Humayun Kabir की आम जनता उन्नयन पार्टी ने आधिकारिक तौर पर गठबंधन का ऐलान किया। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल चुनाव “हमारे भाई हुमायूं कबीर” के साथ मिलकर लड़ेगी। इसी दौरान जब एआईएमआईएम पर भाजपा की ‘बी टीम’ होने के आरोपों पर सवाल किया गया, तो ओवैसी का जवाब और भी चौंकाने वाला था—“मुसलमानों की पूरी टीम हम ही हैं, हम ‘टीम एम’ हैं।” यहीं से बहस का असली मुद्दा शुरू होता है। क्या भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में किसी एक नेता या पार्टी को पूरे मुस्लिम समाज की “पूरी टीम” घोषित किया जा सकता है? भारत का मुसलमान समाज एकरूप नहीं है। यह अलग-अलग भाषाओं, क्षेत्रों, जातीय समूहों और सामाज...
सांप के नए साल और कैसे जश्न मना रहे हैं और कैसे? | व्याख्यार समाचार
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सांप के नए साल और कैसे जश्न मना रहे हैं और कैसे? | व्याख्यार समाचार

चीनी नव वर्ष या चंद्र नव वर्ष कई एशियाई देशों में एक प्रमुख उत्सव है और दुनिया भर में उनके डायस्पोरस हैं। चीनी नव वर्ष, जिसे स्प्रिंग फेस्टिवल भी कहा जाता है, लगभग दो सप्ताह का उत्सव है, जो चीनी कैलेंडर वर्ष के पहले दिन को चिह्नित करता है, जो इस साल बुधवार को भूमि है। प्रत्येक चीनी नव वर्ष 12 साल के चक्र के आसपास घूमता है और चीनी राशि चक्र में एक जानवर के साथ जुड़ा हुआ है, जिसे बाद में पांच तत्वों में से किसी एक के साथ जोड़ा जाता है: धातु, लकड़ी, पानी, आग और पृथ्वी। यह नया साल लकड़ी के सांप के वर्ष को चिह्नित करता है। जबकि इसकी उत्पत्ति चीन में है, और मलेशिया, फिलीपींस और सिंगापुर जैसे देशों में चीनी समुदाय एक ही नाम के तहत और इसी तरह की परंपराओं के साथ मनाते हैं, अन्य, जैसे कि वियतनाम और कोरियाई प्रायद्वीप, उनके चंद्र नए के लिए एक पूरी तरह से अलग नाम है वर्ष त्यौहार। एक महिला चीनी नव वर्ष...
गौरी लंकेश का आख़िरी संपादकीय: भारत में फ़ेक न्यूज़ कैसे बन रहा है हथियार
कर्नाटक, राजनीति, सोशल मीडिया

गौरी लंकेश का आख़िरी संपादकीय: भारत में फ़ेक न्यूज़ कैसे बन रहा है हथियार

Image © Hari Prasad Nadig फ़ेक न्यूज़ के बढ़ते खतरे पर गौरी लंकेश का आख़िरी संपादकीय नई दिल्ली/बेंगलुरु: वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश द्वारा लिखित अंतिम संपादकीय में देश में बढ़ती फ़ेक न्यूज़ की समस्या और उसके प्रभावों पर गंभीर चिंता जताई गई थी। 16 पन्नों की साप्ताहिक पत्रिका में प्रकाशित यह संपादकीय 13 सितंबर के अंक में छपा था, जो उनके जीवन का अंतिम लेख साबित हुआ। गौरी लंकेश अपने कॉलम ‘कंडा हागे’ (अर्थ: जैसा मैंने देखा) के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय रखती थीं। इस अंतिम लेख में उन्होंने विशेष रूप से सोशल मीडिया पर फैल रही झूठी खबरों और उनके राजनीतिक उपयोग पर प्रकाश डाला। गणेश चतुर्थी के दौरान फैलाई गई भ्रामक जानकारी संपादकीय में एक उदाहरण देते हुए बताया गया कि गणेश चतुर्थी के दौरान कर्नाटक में सोशल मीडिया पर एक फर्जी सूचना फैलाई गई। इसमें दावा किया गया कि...