
Image © Hari Prasad Nadig
फ़ेक न्यूज़ के बढ़ते खतरे पर गौरी लंकेश का आख़िरी संपादकीय
नई दिल्ली/बेंगलुरु: वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश द्वारा लिखित अंतिम संपादकीय में देश में बढ़ती फ़ेक न्यूज़ की समस्या और उसके प्रभावों पर गंभीर चिंता जताई गई थी। 16 पन्नों की साप्ताहिक पत्रिका में प्रकाशित यह संपादकीय 13 सितंबर के अंक में छपा था, जो उनके जीवन का अंतिम लेख साबित हुआ।
गौरी लंकेश अपने कॉलम ‘कंडा हागे’ (अर्थ: जैसा मैंने देखा) के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय रखती थीं। इस अंतिम लेख में उन्होंने विशेष रूप से सोशल मीडिया पर फैल रही झूठी खबरों और उनके राजनीतिक उपयोग पर प्रकाश डाला।
गणेश चतुर्थी के दौरान फैलाई गई भ्रामक जानकारी
संपादकीय में एक उदाहरण देते हुए बताया गया कि गणेश चतुर्थी के दौरान कर्नाटक में सोशल मीडिया पर एक फर्जी सूचना फैलाई गई। इसमें दावा किया गया कि गणेश प्रतिमा स्थापना के लिए सरकार की सख्त शर्तें लागू की गई हैं, जिनमें भारी डिपॉजिट और अनुमति प्रक्रिया शामिल है।
हालांकि, बाद में कर्नाटक पुलिस प्रमुख आर. के. दत्ता ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया था और यह पूरी तरह झूठी खबर थी।
फ़ेक न्यूज़ के स्रोत और प्रभाव
जांच में इस फर्जी खबर का स्रोत postcard.in नामक वेबसाइट बताई गई, जिस पर नियमित रूप से भ्रामक सामग्री प्रकाशित होने का आरोप है। लेख में कहा गया है कि इस तरह की खबरें राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित होती हैं और आम जनता के बीच भ्रम फैलाती हैं।
सोशल मीडिया पर तस्वीरों के साथ छेड़छाड़
संपादकीय में कई उदाहरण दिए गए हैं, जहां तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। राम रहीम मामले में राजनीतिक नेताओं की छवि प्रभावित करने के लिए फोटोशॉप का इस्तेमाल किया गया, जिसे बाद में गलत साबित किया गया।
इसी तरह, पश्चिम बंगाल और बेंगलुरु से जुड़े मामलों में पुरानी या असंबंधित तस्वीरों को नए घटनाक्रम से जोड़कर वायरल किया गया।
मुख्यधारा मीडिया पर भी सवाल
लेख में मुख्यधारा मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कई मीडिया संस्थान सरकारी आंकड़ों और दावों को बिना सत्यापन के प्रसारित करते हैं।
उदाहरण के तौर पर, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के शपथ ग्रहण के बाद सोशल मीडिया फॉलोअर्स बढ़ने की खबर को बिना जांच के प्रसारित किया गया, जबकि वास्तविकता कुछ और थी।
फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म की भूमिका अहम
गौरी लंकेश ने अपने लेख में उन व्यक्तियों और संगठनों का भी उल्लेख किया है, जो फेक न्यूज़ के खिलाफ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इनमें ध्रुव राठी, altnews.in, boomlive, fact check, thewire.in, scroll.in और newslaundry जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
इनके प्रयासों को लोकतंत्र के लिए सकारात्मक बताया गया है, क्योंकि ये झूठी खबरों का पर्दाफाश कर जनता को सही जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
नेताओं द्वारा भ्रामक जानकारी साझा करने के आरोप
लेख में कुछ राजनीतिक नेताओं पर भी गलत तस्वीरें और जानकारी साझा करने के आरोप लगाए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, एक तस्वीर को हैदराबाद की घटना बताकर साझा किया गया, जबकि वह पाकिस्तान की थी। इसी तरह, अन्य मामलों में भी गलत संदर्भों के साथ तस्वीरें प्रस्तुत की गईं।
स्वयं की गलती स्वीकार करने का संदेश
गौरी लंकेश ने अपने संपादकीय में यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने भी एक बार अनजाने में फेक न्यूज़ साझा की थी, जिसे बाद में हटाकर उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी गलती मानी।
अंत में
संपादकीय के अंत में उन्होंने फ़ेक न्यूज़ का पर्दाफाश करने वाले लोगों की सराहना की और उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसे प्रयास और बढ़ेंगे। उन्होंने इसे लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक बताया।

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