गौरी लंकेश का आख़िरी संपादकीय: भारत में फ़ेक न्यूज़ कैसे बन रहा है हथियार
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फ़ेक न्यूज़ के बढ़ते खतरे पर गौरी लंकेश का आख़िरी संपादकीय
नई दिल्ली/बेंगलुरु: वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश द्वारा लिखित अंतिम संपादकीय में देश में बढ़ती फ़ेक न्यूज़ की समस्या और उसके प्रभावों पर गंभीर चिंता जताई गई थी। 16 पन्नों की साप्ताहिक पत्रिका में प्रकाशित यह संपादकीय 13 सितंबर के अंक में छपा था, जो उनके जीवन का अंतिम लेख साबित हुआ।
गौरी लंकेश अपने कॉलम ‘कंडा हागे’ (अर्थ: जैसा मैंने देखा) के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेबाक राय रखती थीं। इस अंतिम लेख में उन्होंने विशेष रूप से सोशल मीडिया पर फैल रही झूठी खबरों और उनके राजनीतिक उपयोग पर प्रकाश डाला।
गणेश चतुर्थी के दौरान फैलाई गई भ्रामक जानकारी
संपादकीय में एक उदाहरण देते हुए बताया गया कि गणेश चतुर्थी के दौरान कर्नाटक में सोशल मीडिया पर एक फर्जी सूचना फैलाई गई। इसमें दावा किया गया कि...
