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मनरेगा 2017 रिपोर्ट: जल संरक्षण और रोजगार में ऐतिहासिक वृद्धि
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मनरेगा 2017 रिपोर्ट: जल संरक्षण और रोजगार में ऐतिहासिक वृद्धि

मनरेगा के तहत जल संरक्षण और रोजगार में ऐतिहासिक उछाल नई दिल्ली | (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के क्रियान्वयन में वर्ष 2017 की पहली तिमाही के दौरान अभूतपूर्व प्रगति देखी गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2017 के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में दिहाड़ी मजदूरी की मांग में भारी वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य केंद्र जल संरक्षण कार्य रहा है। रोजगार और भुगतान: एक नया कीर्तिमान वर्तमान में लगभग 75 करोड़ व्यक्ति दिवस का काम पहले ही उपलब्ध कराया जा चुका है। अनुमान है कि 15 जुलाई 2017 तक यह संख्या और बढ़ेगी। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के विभिन्न हिस्सों में प्रतिदिन 80 लाख से 1 करोड़ लोग मनरेगा के तहत कार्यरत हैं। प्रशासनिक दक्षता में सुधार का सबसे बड़ा प्रमाण भुगतान प्रक्रिया में दिखता है: समयबद्ध भुगतान: 86% से अ...
प्राकृतिक रेशा: भारतीय वस्त्र उद्योग की शक्ति और भविष्य की चुनौतियां
कृषि व्यवसाय

प्राकृतिक रेशा: भारतीय वस्त्र उद्योग की शक्ति और भविष्य की चुनौतियां

Image Credit: PIB प्राकृतिक रेशा भारतीय वस्त्र उद्योग की आधारशिला: केंद्रीय कृषि मंत्री ​गांधीनगर (गुजरात): केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने प्राकृतिक रेशों के आर्थिक और सामाजिक महत्व पर बल देते हुए इन्हें भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ करार दिया है। गांधीनगर में आयोजित 'टेक्सटाइल इंडिया 2017' को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि देश के समावेशी विकास में इस क्षेत्र का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। ​उद्योग में 60% से अधिक की हिस्सेदारी ​मंत्री ने रेखांकित किया कि भारतीय वस्त्र उद्योग मुख्य रूप से प्राकृतिक रेशों पर टिका हुआ है, जिसकी कुल उद्योग में 60% से अधिक की भागीदारी है। कृषि के उपरांत, यह क्षेत्र रोजगार सृजन का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। वर्तमान में भारत के लगभग 30 लाख किसान इस क्षेत्र से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर 7.5 करोड़ परिवार प्र...