आईबीसी सुधारों का उद्देश्य व्यवसाय निरंतरता के साथ लेनदार अधिकारों को संतुलित करना है
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (केएनएन) दिवाला और दिवालियापन संहिता में प्रस्तावित संशोधन भारत के दिवाला ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देते हैं, जिससे चूक करने वाले कंपनी प्रमोटरों को नियंत्रण बनाए रखने और ऋणदाता पर्यवेक्षण के तहत पुनरुद्धार का प्रयास करने का मौका मिलता है। पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़े आपूर्ति श्रृंखला दबाव सहित वैश्विक व्यवधानों के कारण कुछ क्षेत्रों में उभरते तनाव के बीच यह कदम उठाया गया है। नए तंत्र से संकटग्रस्त कंपनियों को लेनदार हितों की सुरक्षा करते हुए संचालन को स्थिर करने के लिए एक खिड़की प्रदान करने की उम्मीद है।
संसद ने पिछले हफ्ते दिवाला और दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी।
प्रमुख नए प्रावधानों में, विधेयक में वास्तविक व्यावसायिक विफलताओं के लिए अदालत के बाहर शुरुआत तंत्र के साथ "लेनदार द्वारा शुरू की गई दिवाला समाधान प्रक्रिया" का प्रावध...








