संपादकीय

Asaduddin Owaisi का “टीम एम” का दावा: यह दावा कितना सही है?
विश्लेषण, संपादकीय

Asaduddin Owaisi का “टीम एम” का दावा: यह दावा कितना सही है?

“टीम एम” का दावा और भारतीय मुसलमानों की असल हक़ीक़त पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज़ हो गई है। इसी क्रम में बुधवार को Asaduddin Owaisi की पार्टी एआईएमआईएम और Humayun Kabir की आम जनता उन्नयन पार्टी ने आधिकारिक तौर पर गठबंधन का ऐलान किया। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल चुनाव “हमारे भाई हुमायूं कबीर” के साथ मिलकर लड़ेगी। इसी दौरान जब एआईएमआईएम पर भाजपा की ‘बी टीम’ होने के आरोपों पर सवाल किया गया, तो ओवैसी का जवाब और भी चौंकाने वाला था—“मुसलमानों की पूरी टीम हम ही हैं, हम ‘टीम एम’ हैं।” यहीं से बहस का असली मुद्दा शुरू होता है। क्या भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में किसी एक नेता या पार्टी को पूरे मुस्लिम समाज की “पूरी टीम” घोषित किया जा सकता है? भारत का मुसलमान समाज एकरूप नहीं है। यह अलग-अलग भाषाओं, क्षेत्रों, जातीय समूहों और सामाज...
डिमोना हमला: ईरान की मिसाइल ताक़त और बदलता मध्य पूर्व
इज़राइल, ईरान, विश्लेषण, संपादकीय

डिमोना हमला: ईरान की मिसाइल ताक़त और बदलता मध्य पूर्व

डिमोना पर हमला—मध्य पूर्व में बदलते शक्ति संतुलन की चेतावनी मध्य पूर्व एक बार फिर वैश्विक चिंता के केंद्र में है। 21–22 मार्च की रात ईरान द्वारा इज़रायल के परमाणु शहर डिमोना के पास किया गया बैलिस्टिक मिसाइल हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि एक गहरी रणनीतिक घोषणा है। यह हमला बताता है कि क्षेत्र में शक्ति संतुलन तेज़ी से बदल रहा है और पारंपरिक सुरक्षा ढांचे अब पहले जैसे अभेद्य नहीं रहे। डिमोना कोई सामान्य शहर नहीं है। यह इज़रायल की परमाणु क्षमताओं का प्रतीक माना जाता है और दशकों से इसे देश के सबसे सुरक्षित क्षेत्रों में गिना जाता रहा है। यहां अमेरिकी पैट्रियट और THAAD जैसे अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टमों के साथ-साथ इज़रायल की अपनी एरो और आयरन बीम तकनीक भी तैनात है। ऐसे किलेबंद इलाक़े पर हमला होना ही अपने आप में एक बड़ा संकेत है—और उससे भी बड़ा संकेत यह है कि इन सुरक्षा परतों को भेदते ...
होर्मुज़ पर तनाव: दक्षिण एशिया अब तमाशबीन नहीं रह सकता
विश्लेषण, संपादकीय

होर्मुज़ पर तनाव: दक्षिण एशिया अब तमाशबीन नहीं रह सकता

होर्मुज़ पर तनाव: दक्षिण एशिया अब चुप नहीं रह सकता अगर होर्मुज़ में संकट गहराता है, तो उसका असर केवल खाड़ी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। तेल, व्यापार, महँगाई और आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर इसका सीधा असर दक्षिण एशिया को भी झेलना पड़ेगा। ऐसे समय में ग्लोबल साउथ की कूटनीति कोई आदर्शवादी बात नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक ज़रूरत है। पश्चिम एशिया का युद्ध अगर समुद्र तक पहुँचा, तो उसकी लहरें दक्षिण एशिया की जेब तक आएँगी। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव अब केवल उस क्षेत्र की सीमाओं में बंद संकट नहीं रह गया है। अगर हालात और बिगड़ते हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ तक अस्थिरता फैलती है, तो उसका असर सीधे दक्षिण एशिया की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ेगा। तेल के दाम, व्यापारिक आवाजाही, शिपिंग लागत और महँगाई — सब इस संकट से प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे...