बंगाल में अधिकारियों के तबादले पर सियासी घमासान, उमर अब्दुल्ला बोले- गैर-भाजपा राज्यों में ही होती है ऐसी कार्रवाई
नई दिल्ली/कोलकाता, 21 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले को लेकर सियासत तेज हो गई है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के व्यापक तबादले केवल गैर-भाजपा शासित राज्यों में ही देखने को मिलते हैं।
उमर अब्दुल्ला ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के समर्थन में सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बंगाल एक बार फिर साबित करेगा कि चुनाव अधिकारियों के सहारे नहीं, बल्कि राजनीतिक दल अपने कार्यकर्ताओं और जनसमर्थन के दम पर चुनाव जीतते हैं। उमर ने यह भी दावा किया कि चुनाव आयोग की कोशिशों से नतीजे नहीं बदलेंगे और मतगणना के दिन ममता बनर्जी बहुमत के साथ उभरेंगी।
दरअसल, चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में कई वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों का तबादला किया। रिपोर्टों के मुताबिक, अब तक दर्जनों अफसरों को बदला जा चुका है, जिनमें शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। यह कार्रवाई चुनावी निष्पक्षता के नाम पर की गई, लेकिन राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने इसे राजनीतिक हस्तक्षेप करार दिया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कदम की तीखी आलोचना करते हुए इसे “अघोषित राष्ट्रपति शासन” जैसा बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग राज्य प्रशासन पर असाधारण दखल दे रहा है। इस विवाद को लेकर बंगाल सरकार और तृणमूल कांग्रेस की ओर से कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया गया है, जहां तबादला आदेश को चुनौती दी गई है।
मामले में विपक्षी दलों और भाजपा विरोधी नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। तृणमूल कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने ममता बनर्जी को अग्रिम बधाई देते हुए कहा कि बंगाल की जनता उनके पक्ष में मतदान करेगी। आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए चुनाव आयोग को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता, राज्यों के प्रशासनिक अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में संस्थाओं की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पश्चिम बंगाल चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आएंगे, यह विवाद और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है। फिलहाल, अफसरों के तबादले का मुद्दा बंगाल की चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है।