
नई दिल्ली, 18 मई (केएनएन) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संगठन के कामकाज और गतिविधियों की समीक्षा के लिए नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने भारतीय कृषि को मजबूत करने और देश भर में कृषक समुदायों को समर्थन देने के उद्देश्य से आईसीएआर के चल रहे कार्यक्रमों और भविष्य की योजनाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया।
आईसीएआर के महानिदेशक और सचिव, कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (डीएआरई) डॉ. एमएल जाट ने मंत्री को परिषद द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न पहलों के बारे में जानकारी दी और कृषि अनुसंधान और विकास के लिए भविष्य के रोडमैप की रूपरेखा तैयार की।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि भारत की आबादी के एक बड़े हिस्से के लिए आजीविका का प्राथमिक स्रोत बनी हुई है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख स्तंभ बनी हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसानों के लिए कृषि को अधिक उत्पादक, कम लागत वाली और लाभदायक बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने देश भर में एकीकृत और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एकीकृत खेती को व्यापक रूप से अपनाने से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी, साथ ही प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा होगी और पर्यावरणीय स्थिरता का समर्थन होगा।
कृषि पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए, चौहान ने अधिकारियों को राज्य सरकारों के परामर्श से कृषि-जलवायु परिस्थितियों के आधार पर राज्य-विशिष्ट कृषि रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया।
(केएनएन ब्यूरो)

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