पीजी पाठ्यक्रम करने के इच्छुक पीएचसी डॉक्टरों के लिए सेवाकालीन कोटा बढ़ाकर 20% किया गया

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बुधवार को विजयवाड़ा में कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन करते पीएचसी डॉक्टर। | फोटो साभार: केवीएस गिरि

स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्री वाई. सत्य कुमार यादव ने घोषणा की है कि क्लिनिकल विभाग की सभी शाखाओं में पीजी पाठ्यक्रमों में पीएचसी डॉक्टरों के लिए सेवाकालीन कोटा बढ़ाकर 20% किया जाएगा।

श्री सत्य कुमार 25 सितंबर (बुधवार) को मंगलागिरी स्थित एपीआईआईसी टावर्स में एक बैठक को संबोधित कर रहे थे, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सक संघ के प्रतिनिधियों, विशेष मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) एमटी कृष्ण बाबू, आयुक्त सी. हरि किरण और चिकित्सा शिक्षा निदेशक डीएसवीएल नरसिम्हम ने भाग लिया।

इस वर्ष जुलाई में जारी किए गए सरकारी आदेश संख्या 85 में मेडिकल कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम करने के इच्छुक पीएचसी डॉक्टरों के लिए सेवाकालीन आरक्षण को क्लिनिकल विशिष्टताओं में 30% से घटाकर 15% और गैर-क्लिनिकल विशिष्टताओं में 50% से घटाकर 30% कर दिया गया।

डॉक्टर पिछले 15 दिनों से सरकारी आदेश वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। पिछले सप्ताह आयोजित बैठक में मंत्री ने सरकारी आदेश में संशोधन करने पर सहमति जताई थी, लेकिन प्रतिशत तय करने के लिए बैठक बाद में होनी थी।

पीएचसी डॉक्टरों से तुरंत अपनी ड्यूटी पर लौटने की अपील करते हुए मंत्री ने कहा कि कोटा बढ़ाकर 20% करने से 258 अतिरिक्त पीजी सीटें उपलब्ध हो जाएंगी।

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने सरकारी आदेश में उस बिन्दु को संशोधित कर दिया है जिसके तहत डॉक्टरों को अपने डिप्लोमा वाली शाखा में ही पीजी कोर्स करना अनिवार्य था, तथा कहा कि अब वे किसी भी शाखा में कोर्स चुन सकते हैं।

दूसरा संशोधन पीएचसी डॉक्टरों पर प्रतिबंधों के बारे में था जो दूसरी पीजी डिग्री लेना चाहते थे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सेवारत उम्मीदवार अपने खर्च पर दूसरी पीजी डिग्री ले सकते हैं।

मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार उनकी अन्य मांगों जैसे जनजातीय भत्ता पर भी विचार करेगी। उन्होंने कहा कि पीएचसी डॉक्टरों को अपनी हड़ताल समाप्त कर देनी चाहिए और तुरंत काम पर लौटना चाहिए।

इससे पहले दिन में कई डॉक्टरों ने विजयवाड़ा में कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर अपनी समस्याएं बताईं।



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