एलोन मस्क पर जूरी का फैसला, ट्विटर केस में बड़ा खुलासा

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एलोन मस्क पर जूरी का बड़ा फैसला: ट्विटर डील से पहले निवेशकों को गुमराह करने का आरोप साबित, कुछ मामलों में मिली राहत


सैन फ्रांसिस्को, 21 मार्च 2026: दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल टेक उद्यमी एलोन मस्क को लेकर अमेरिका की एक जूरी ने बड़ा फैसला सुनाया है। जूरी ने पाया कि मस्क ने सोशल मीडिया कंपनी Twitter (अब X) के 44 अरब डॉलर के अधिग्रहण से पहले शेयर कीमत को प्रभावित करने के लिए निवेशकों को गुमराह किया था।


हालांकि, सैन फ्रांसिस्को में चले इस सिविल ट्रायल में मस्क को धोखाधड़ी के कुछ अन्य आरोपों से राहत भी मिल गई।


क्या था मामला?


यह मामला एक क्लास-एक्शन मुकदमे से जुड़ा है, जिसमें हजारों शेयरधारकों ने आरोप लगाया था कि मस्क के ट्वीट और सार्वजनिक बयानों के कारण उन्होंने अपने शेयर नुकसान में बेचे।


जूरी को यह तय करना था कि मई 2022 में मस्क द्वारा किए गए ट्वीट्स और एक पॉडकास्ट में दिए गए बयान क्या जानबूझकर निवेशकों को भ्रमित करने के लिए थे।


बॉट्स को लेकर विवाद


मामले का केंद्र मस्क का यह दावा था कि ट्विटर ने अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद फर्जी और स्पैम खातों यानी ‘बॉट्स’ की संख्या को कम करके दिखाया।


मस्क ने एक ट्वीट में कहा था कि जब तक यह साबित नहीं होता कि बॉट्स की संख्या 5% से कम है, तब तक अधिग्रहण आगे नहीं बढ़ सकता। इस बयान का असर कंपनी के शेयरों पर पड़ा।


कोर्ट में दलीलें


शेयरधारकों के वकील ने आरोप लगाया कि मस्क के बयानों ने कंपनी और उसके स्टॉक को नुकसान पहुंचाया। वहीं मस्क के वकील ने दलील दी कि बॉट्स को लेकर उनकी चिंता वास्तविक थी और इसे धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता।


कितना देना होगा हर्जाना?


फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मस्क को निवेशकों को कितनी क्षतिपूर्ति देनी होगी, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह रकम अरबों डॉलर में हो सकती है।


आखिरकार पूरी हुई डील


गौरतलब है कि मस्क ने शुरुआत में इस सौदे से पीछे हटने की कोशिश की थी, जिसके बाद ट्विटर ने उन्हें कानूनी रूप से समझौता पूरा करने के लिए बाध्य किया। अंततः मस्क ने अक्टूबर 2022 में कंपनी का अधिग्रहण पूरा किया और बाद में इसका नाम बदलकर X कर दिया।


अन्य कानूनी चुनौतियां


मस्क पर अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) की ओर से भी एक अलग सिविल मुकदमा चल रहा है। इसमें आरोप है कि उन्होंने ट्विटर में अपनी हिस्सेदारी का खुलासा करने में देरी की, ताकि कम कीमत पर अधिक शेयर खरीदे जा सकें।


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