कृषि महोत्सव 2026 में किसानों को वैज्ञानिकों से मिलेगा सीधा मार्गदर्शन: चौहान

कृषि-महोत्सव-2026-में-किसानों-को-वैज्ञानिकों-से-मिलेगा-सीधा कृषि महोत्सव 2026 में किसानों को वैज्ञानिकों से मिलेगा सीधा मार्गदर्शन: चौहान


नई दिल्ली, 6 अप्रैल (केएनएन) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि 11 अप्रैल से रायसेन में आयोजित होने वाले उन्नत कृषि महोत्सव 2026-प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण में किसानों को प्रमुख कृषि वैज्ञानिकों से सीधा मार्गदर्शन मिलेगा।

मंत्री ने कहा कि दशहरा मैदान में आयोजित होने वाला तीन दिवसीय कार्यक्रम एक “ज्ञान महाकुंभ” के रूप में कार्य करेगा, जो किसानों को उत्पादकता और आय बढ़ाने के उद्देश्य से उन्नत कृषि पद्धतियों, आधुनिक प्रौद्योगिकियों और वैज्ञानिक समाधानों से परिचित कराएगा।

उन्होंने कहा कि विषय-विशिष्ट सत्र कई स्थानों पर आयोजित किए जाएंगे, जिसमें डिजिटल कृषि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता-आधारित समाधान, मशीनीकरण और फसल के बाद के प्रबंधन पर प्रशिक्षण के साथ-साथ फसल प्रबंधन से लेकर बाजार लिंकेज तक संपूर्ण कृषि मूल्य श्रृंखला को शामिल किया जाएगा।

फोकस क्षेत्रों पर प्रकाश डालते हुए, चौहान ने कहा कि महोत्सव में प्राकृतिक खेती, बागवानी विस्तार, दालों की उत्पादकता और कृषि अवसंरचना निधि (एआईएफ) जैसी योजनाओं के उपयोग पर चर्चा शामिल होगी।

कृषि अवशेषों को खाद और ऊर्जा जैसे मूल्यवान संसाधनों में परिवर्तित करने के लिए “अपशिष्ट से धन” दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हुए, पराली प्रबंधन पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

दूसरे दिन, सत्र में मृदा स्वास्थ्य, संरक्षित खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली, कीट प्रबंधन, हाइड्रोपोनिक्स, सटीक खेती और सूक्ष्म सिंचाई पर चर्चा की जाएगी, साथ ही किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) की बैठक और पीएमएफबीवाई जैसी फसल बीमा योजनाओं पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

अंतिम दिन बीज आत्मनिर्भरता, मत्स्य पालन, डेयरी विकास, पशुपालन और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से कृषि ऋण सहित विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, साथ ही मुर्गीपालन और बकरी पालन के माध्यम से आय विविधीकरण पर सत्र भी होंगे।

मंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा मृदा परीक्षण, ड्रोन अनुप्रयोग, हाइड्रोपोनिक्स, एकीकृत कृषि प्रणाली और उन्नत नर्सरी तकनीकों सहित लाइव प्रदर्शन पेश किए जाएंगे। किसानों को आयोजन स्थल पर लाए गए नमूनों के आधार पर मृदा स्वास्थ्य रिपोर्ट भी प्राप्त होगी।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महोत्सव का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और क्षेत्र-स्तरीय कार्यान्वयन के बीच अंतर को पाटना है, जिससे किसानों को नवीन प्रथाओं को अपनाने और स्थिरता में सुधार करने में सक्षम बनाया जा सके।

चौहान ने किसानों से बड़ी संख्या में भाग लेने का आग्रह करते हुए कहा कि यह पहल प्रौद्योगिकी, ज्ञान प्रसार और टिकाऊ प्रथाओं के माध्यम से भारतीय कृषि को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

(केएनएन ब्यूरो)



Source link


Discover more from जग वाणी

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *