
‘Feels Like’ तापमान क्या है, यह कैसे तय होता है और क्यों 38°C भी 50°C जैसा महसूस हो सकता है? पढ़िए गर्मी, उमस और हीट इंडेक्स पर विस्तृत रिपोर्ट।
‘Feels Like’ तापमान क्या होता है? क्यों 38°C भी कभी 50°C जैसा महसूस होता है
गर्मी केवल थर्मामीटर का आंकड़ा नहीं होती। हवा में नमी, तेज धूप, हवा की रफ्तार और शरीर की प्रतिक्रिया मिलकर तय करती है कि मौसम इंसान को वास्तव में कितना गर्म या ठंडा महसूस होगा।
देश के कई हिस्सों में लोग इन दिनों एक सामान्य सवाल पूछ रहे हैं — “तापमान तो 38 डिग्री है, लेकिन ऐसा क्यों लग रहा है जैसे 45 या 50 डिग्री हो?”
मौसम ऐप्स और टीवी चैनलों पर अब “Feels Like” या “Real Feel” तापमान भी दिखाया जाने लगा है। कई बार यह वास्तविक तापमान से काफी अधिक होता है। यही कारण है कि कम तापमान होने के बावजूद लोग ज्यादा बेचैनी, पसीना और थकान महसूस करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, “Feels Like” तापमान वह अनुमानित तापमान होता है जो मानव शरीर वास्तव में महसूस करता है। यह केवल थर्मामीटर से मापी गई गर्मी नहीं होती, बल्कि कई मौसमीय कारकों का संयुक्त प्रभाव होता है।
केवल तापमान नहीं, शरीर की प्रतिक्रिया भी मायने रखती है
मान लीजिए किसी शहर का तापमान 38°C है। यदि वहां हवा में नमी यानी ह्यूमिडिटी बहुत अधिक है, तो शरीर को ठंडा रखना कठिन हो जाता है। इंसान का शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा करता है। लेकिन जब हवा में पहले से ही ज्यादा नमी होती है, तो पसीना जल्दी नहीं सूखता। इससे शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती और व्यक्ति को अधिक गर्मी महसूस होती है।
यही वजह है कि तटीय शहरों जैसे Mumbai, Kolkata या Chennai में तापमान अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद उमस ज्यादा परेशान करती है।
इसके उलट, शुष्क इलाकों में तापमान अधिक होने पर भी शरीर को राहत मिल सकती है क्योंकि वहां पसीना तेजी से सूख जाता है।
‘हीट इंडेक्स’ कैसे तय होता है
मौसम वैज्ञानिक “Feels Like” तापमान निकालने के लिए मुख्य रूप से “Heat Index” का उपयोग करते हैं। यह एक वैज्ञानिक गणना है जिसमें दो प्रमुख चीजें शामिल होती हैं:
- वास्तविक तापमान
- हवा में नमी का स्तर
जब दोनों का स्तर ऊंचा होता है, तो हीट इंडेक्स तेजी से बढ़ जाता है।
उदाहरण के तौर पर:
| वास्तविक तापमान | आर्द्रता | महसूस होने वाला तापमान |
|---|---|---|
| 38°C | 70% | लगभग 49°C |
| 40°C | 40% | लगभग 43°C |
| 35°C | 80% | लगभग 47°C |
विशेषज्ञ कहते हैं कि 45°C से अधिक “Feels Like” तापमान शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए।
धूप, हवा और कंक्रीट भी बढ़ाते हैं असर
“Feels Like” केवल नमी से तय नहीं होता। कई अन्य चीजें भी इसमें भूमिका निभाती हैं।
1. सीधी धूप
यदि व्यक्ति खुले मैदान या सड़क पर तेज धूप में खड़ा है, तो उसे छांव की तुलना में कई डिग्री ज्यादा गर्मी महसूस हो सकती है।
2. हवा की रफ्तार
धीमी हवा शरीर की गर्मी बाहर निकालने में मदद नहीं कर पाती। वहीं तेज हवा शरीर को कुछ राहत देती है।
3. शहरी हीट आइलैंड प्रभाव
बड़े शहरों में कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें और वाहनों से निकलने वाली गर्मी दिनभर ताप को जमा रखती हैं। रात में भी शहर जल्दी ठंडे नहीं होते। इसे “Urban Heat Island Effect” कहा जाता है।
Delhi, Mumbai और Hyderabad जैसे महानगरों में यह प्रभाव अधिक देखा जाता है।
शरीर पर क्या असर पड़ता है
अत्यधिक “Feels Like” तापमान शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। डॉक्टरों के अनुसार, लगातार गर्मी और उमस में रहने से:
- डिहाइड्रेशन
- चक्कर आना
- थकावट
- हीट एक्सॉशन
- हीट स्ट्रोक
जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
हीट स्ट्रोक सबसे गंभीर स्थिति मानी जाती है। इसमें शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है और तत्काल चिकित्सा की जरूरत पड़ सकती है।
भारत में क्यों बढ़ रही है समस्या
जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में गर्मी की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ रही हैं। मौसम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में हीटवेव की घटनाएं ज्यादा लंबी और ज्यादा आर्द्र होती जा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बढ़ता समुद्री तापमान भी तटीय राज्यों में नमी बढ़ा रहा है। इससे “Feels Like” तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है।
मौसम ऐप्स में अलग-अलग आंकड़े क्यों दिखते हैं
कई लोग यह भी पूछते हैं कि अलग-अलग ऐप्स अलग “Feels Like” तापमान क्यों दिखाते हैं। इसका कारण यह है कि विभिन्न कंपनियां अलग-अलग मॉडल और डेटा स्रोत इस्तेमाल करती हैं।
कुछ ऐप्स केवल नमी और तापमान को आधार बनाते हैं, जबकि कुछ में:
- हवा की गति
- सूर्य की तीव्रता
- बादल
- मानव शरीर के औसत व्यवहार
जैसे कारकों को भी शामिल किया जाता है।
बचाव के लिए क्या करें
विशेषज्ञ गर्मी और उमस के दौरान कुछ सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं:
- दोपहर 12 से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें
- लगातार पानी पीते रहें
- हल्के और सूती कपड़े पहनें
- कैफीन और बहुत ज्यादा मीठे पेय कम लें
- बच्चों और बुजुर्गों को बंद कमरों में अकेला न छोड़ें
- अत्यधिक थकान या चक्कर आने पर तुरंत आराम करें
भविष्य में और महत्वपूर्ण होगा ‘Feels Like’ डेटा
मौसम विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में केवल वास्तविक तापमान बताना पर्याप्त नहीं होगा। “Feels Like” तापमान लोगों के स्वास्थ्य, कामकाज और दैनिक जीवन पर अधिक प्रभाव डालता है। इसी कारण अब कई देशों की मौसम एजेंसियां हीट इंडेक्स आधारित चेतावनी प्रणाली को प्राथमिकता दे रही हैं।
भारत में भी गर्मी से होने वाली मौतों और स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए “Feels Like” डेटा की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
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ग़ज़नफ़र एक प्रतिष्ठित पत्रकार, लेखक, शोधकर्ता और मीडिया सलाहकार हैं। उनके पास पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है और उन्होंने विभिन्न मीडिया आउटलेट्स के साथ काम किया है। ग़ज़नफ़र की लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और सूचनात्मक है, जो उन्हें पाठकों के बीच लोकप्रिय बनाती है। ग़ज़नफ़र की रचनात्मकता और विश्लेषणात्मक क्षमता उनके लेखन और शोध में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। वे विभिन्न विषयों पर लिखते हैं और विभिन्न संगठनों को मीडिया से सम्बंधित विषयों पर परामर्श प्रदान करते हैं।
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