
498A का दुरुपयोग रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब शिकायत मिलते ही नहीं होगी तुरंत गिरफ्तारी
नई दिल्ली: दहेज प्रताड़ना कानून के गलत इस्तेमाल को रोकने की दिशा में देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने IPC की धारा 498A (दहेज प्रताड़ना) के तहत दर्ज होने वाले मामलों में ‘ऑटोमैटिक’ या तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
परिवार कल्याण समिति की होगी अहम भूमिका
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस यू.यू. ललित की पीठ ने निर्देश दिया है कि अब से दहेज प्रताड़ना की शिकायतों की जांच के लिए हर जिले में कम से कम एक ‘परिवार कल्याण समिति’ (Family Welfare Committee) का गठन किया जाएगा।
इस व्यवस्था की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
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समिति का स्वरूप: इस समिति में सिविल सोसाइटी के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता और जागरूक नागरिक शामिल होंगे।
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गिरफ्तारी पर रोक: पुलिस तब तक आरोपी पक्ष की गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी, जब तक समिति अपनी जांच रिपोर्ट नहीं सौंप देती।
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समय सीमा: समिति को शिकायत मिलने के बाद 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट संबंधित अधिकारी या मजिस्ट्रेट को देनी होगी।
क्यों पड़ा इस आदेश की जरूरत?
अदालत ने माना कि वर्तमान में दहेज विरोधी कानून (498A) का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है, जिसका खामियाजा अक्सर बेगुनाह पति और उसके रिश्तेदारों को भुगतना पड़ता है। कोर्ट का यह फैसला कानून के वास्तविक पीड़ितों को न्याय दिलाने और निर्दोषों को प्रताड़ना से बचाने के बीच संतुलन बनाने की एक कोशिश है।

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