
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (केएनएन) समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) द्वारा जारी अनंतिम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का समुद्री भोजन निर्यात 72,325.82 करोड़ रुपये (8.28 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जिसमें निर्यात मात्रा 19.32 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई।
जमे हुए झींगा ने निर्यात टोकरी पर अपना दबदबा कायम रखा, जिसका योगदान 47,973.13 करोड़ रुपये (5.51 बिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा और कुल कमाई में इसका योगदान दो-तिहाई से अधिक रहा। वर्ष के दौरान झींगा के शिपमेंट में मात्रा में 4.6 प्रतिशत और मूल्य में 6.35 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
2.32 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आयात के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना रहा, हालांकि शिपमेंट में मात्रा में 19.8 प्रतिशत और मूल्य में 14.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसका मुख्य कारण पारस्परिक शुल्क का प्रभाव था।
वैकल्पिक बाज़ारों में मजबूत वृद्धि से गिरावट की भरपाई हो गई। चीन को निर्यात में मूल्य में 22.7 प्रतिशत और मात्रा में 20.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि यूरोपीय संघ को निर्यात में मूल्य में 37.9 प्रतिशत और मात्रा में 35.2 प्रतिशत की तेजी से वृद्धि हुई।
दक्षिण पूर्व एशियाई बाजारों में भी मूल्य में 36.1 प्रतिशत और मात्रा में 28.2 प्रतिशत से अधिक की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। जापान को निर्यात मूल्य में 6.55 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पश्चिम एशिया में मामूली गिरावट देखी गई।
उत्पाद पक्ष में, जमी हुई मछली, स्क्विड, कटलफिश, सूखी वस्तुओं और जीवित उत्पादों के निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि ठंडे उत्पादों में गिरावट आई। सुरीमी, फिशमील और मछली के तेल जैसे मूल्य वर्धित खंडों ने भी बेहतर प्रदर्शन दिखाया।
लॉजिस्टिक्स के संदर्भ में, विशाखापत्तनम बंदरगाह, जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह, कोचीन बंदरगाह, कोलकाता बंदरगाह और चेन्नई बंदरगाह सहित प्रमुख बंदरगाहों का कुल निर्यात मूल्य में लगभग 64 प्रतिशत योगदान था।
(केएनएन ब्यूरो)

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