
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने जो सैको की पुस्तक The Once and Future Riot का भारत में वितरण रोक दिया। जानिए विवाद की पूरी वजह।
मुज़फ्फरनगर दंगों पर आधारित जो सैको की किताब भारत में नहीं होगी वितरित, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने लिया फैसला
नक्शे और सामग्री से जुड़े सवालों के चलते प्रकाशक ने रोकी पुस्तक की भारतीय वितरण योजना
नई दिल्ली (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): प्रसिद्ध प्रकाशन संस्था पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित ग्राफिक पत्रकार और लेखक जो सैको की गैर-काल्पनिक पुस्तक “द वन्स एंड फ्यूचर रायट” (The Once and Future Riot) को भारत में वितरित नहीं करने का फैसला किया है। यह पुस्तक वर्ष 2013 के मुज़फ्फरनगर दंगों और उनके बाद के सामाजिक प्रभावों पर आधारित है।
यह पुस्तक पहली बार अक्टूबर 2025 में प्रकाशित हुई थी और इसे भारत में अगस्त 2026 से वितरित किया जाना था। हालांकि, प्रकाशक ने समीक्षा और कानूनी जांच के दौरान सामने आए कुछ मुद्दों का हवाला देते हुए इसके वितरण को रद्द कर दिया है।
समीक्षा प्रक्रिया में उठे सवाल
अंग्रेजी दैनिक द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) गौरव श्रीनागेश ने बताया कि पुस्तक की प्रारंभिक समीक्षा और कानूनी जांच के दौरान कई आपत्तियां सामने आई थीं।
उन्होंने कहा कि भारतीय प्रकाशक की ओर से पुस्तक की सामग्री और उसमें प्रयुक्त कुछ तथ्यों के संबंध में स्पष्टीकरण तथा संदर्भ मांगे गए थे। इसके अलावा पुस्तक में शामिल एक नक्शे को लेकर भी गंभीर आपत्ति दर्ज की गई थी।
श्रीनागेश के अनुसार, “हमने पुस्तक से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए थे और संबंधित स्पष्टीकरण मांगे थे। लेकिन हमें आवश्यक उत्तर प्राप्त नहीं हुए। ऐसे में पुस्तक को भारत में वितरित करना उचित नहीं समझा गया।”
विवाद का केंद्र बना नक्शा
प्रकाशक द्वारा व्यक्त प्रमुख चिंताओं में से एक पुस्तक में प्रकाशित नक्शा था। कंपनी का कहना है कि नक्शे में भारत की सीमाओं को सही तरीके से नहीं दिखाया गया था।
भारत में मानचित्रों और सीमाओं से संबंधित विषय अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं। ऐसे मामलों में प्रकाशकों और मीडिया संस्थानों को कानूनी नियमों का पालन करना होता है। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का कहना है कि यदि किसी प्रकाशन में भारत की सीमाओं को गलत तरीके से दर्शाया जाता है और उसमें सुधार नहीं किया जाता, तो वह उसके वितरण की जिम्मेदारी नहीं ले सकता।
श्रीनागेश ने कहा, “यदि हमें यह पता है कि कोई नक्शा गलत है और उसमें संशोधन नहीं किया जा रहा है, तो हम उसे प्रकाशित या वितरित नहीं करेंगे। समीक्षा के दौरान उठी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ, इसलिए वितरण रोकने का निर्णय लिया गया।”
मुज़फ्फरनगर दंगों की पृष्ठभूमि
वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर और पड़ोसी शामली जिले में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा भड़की थी। इन दंगों में कम से कम 60 लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि हजारों लोग अपने घर छोड़ने पर मजबूर हो गए थे।
सबसे अधिक प्रभावित मुस्लिम समुदाय के लोग थे, जिनमें बड़ी संख्या में परिवार राहत शिविरों में रहने को विवश हुए। उस समय महिलाओं के खिलाफ हिंसा, यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार की घटनाओं की भी कई रिपोर्टें सामने आई थीं।
इन दंगों को स्वतंत्र भारत के सबसे गंभीर सांप्रदायिक संघर्षों में से एक माना जाता है। इसका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव वर्षों तक महसूस किया गया।
एक वर्ष बाद मुज़फ्फरनगर पहुंचे थे जो सैको
द वन्स एंड फ्यूचर रायट जो सैको की उस यात्रा पर आधारित है जो उन्होंने दंगों के लगभग एक वर्ष बाद मुज़फ्फरनगर में की थी। पुस्तक में उन्होंने प्रभावित लोगों, स्थानीय निवासियों और विभिन्न पक्षों से बातचीत के आधार पर घटनाओं को प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
ग्राफिक पत्रकारिता की शैली में लिखी गई यह पुस्तक चित्रों और रिपोर्टिंग का संयोजन है। इस शैली के माध्यम से लेखक जटिल सामाजिक और राजनीतिक विषयों को दृश्य रूप में पाठकों तक पहुंचाते हैं।
कौन हैं जो सैको?
जो सैको को दुनिया के सबसे प्रभावशाली ग्राफिक पत्रकारों में गिना जाता है। उन्होंने संघर्ष क्षेत्रों, युद्धों और मानवाधिकार मुद्दों पर व्यापक काम किया है।
उनकी चर्चित पुस्तकों में “Palestine”, “Footnotes in Gaza” और “Days of Destruction, Days of Revolt” शामिल हैं। उनकी रचनाएं पत्रकारिता और चित्रकला के अनूठे मिश्रण के लिए जानी जाती हैं।
सैको के कार्यों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है और उन्हें आधुनिक ग्राफिक पत्रकारिता का अग्रणी चेहरा माना जाता है।
प्रकाशन जगत में चर्चा
पुस्तक के वितरण को रोकने के फैसले ने प्रकाशन जगत में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर प्रकाशक का कहना है कि कानूनी और तथ्यात्मक चिंताओं का समाधान आवश्यक था, वहीं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रकाशकीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन को लेकर भी चर्चा हो रही है।
हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने स्पष्ट किया है कि उसका निर्णय केवल समीक्षा प्रक्रिया के दौरान सामने आए तकनीकी और कानूनी मुद्दों पर आधारित है।
आगे क्या?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पुस्तक के प्रकाशक या लेखक की ओर से इन आपत्तियों पर कोई संशोधित संस्करण जारी किया जाएगा या नहीं। यदि विवादित बिंदुओं पर सहमति बनती है, तो भविष्य में भारत में पुस्तक के वितरण पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
फिलहाल, द वन्स एंड फ्यूचर रायट भारतीय बाजार में उपलब्ध नहीं होगी और पाठकों को इसके भारतीय संस्करण का इंतजार करना पड़ सकता है।
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