
पश्चिम बंगाल में 2019 के CAA विरोध प्रदर्शनों के दौरान रेलवे को हुए 93 करोड़ रुपये के नुकसान के मामलों की फिर से समीक्षा होगी।
CAA विरोध प्रदर्शनों की हिंसा पर फिर कार्रवाई की तैयारी, रेलवे नुकसान की भरपाई दोषियों से वसूली जाएगी
2019 के मामलों की दोबारा होगी समीक्षा, बंद और लंबित फाइलें फिर खुलेंगी
कोलकाता, 7 जून (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में वर्ष 2019 में हुए हिंसक प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर एक बार फिर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने उन मामलों की समीक्षा करने का निर्णय लिया है जिनमें रेलवे संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया था। अधिकारियों के अनुसार, नुकसान की भरपाई कथित दोषियों से वसूलने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में केंद्रीय रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई। बैठक के बाद राज्य के पुलिस महानिदेशक एस.एन. गुप्ता को 2019 के सीएए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सभी मामलों की विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
बंद फाइलें फिर से खोली जाएंगी
अधिकारियों का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया के तहत उन सभी मामलों को दोबारा देखा जाएगा जो वर्तमान में लंबित हैं या जिन्हें पहले बंद कर दिया गया था। जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों, वीडियो फुटेज, पुलिस रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का पुनर्मूल्यांकन करेंगी।
सरकार का मानना है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान कर उन्हें कानूनी रूप से जवाबदेह बनाया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से पुराने मामलों को फिर से सक्रिय किया जा रहा है।
रेलवे को हुआ था भारी नुकसान
दिसंबर 2019 में सीएए के खिलाफ देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। उस दौरान कई रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों और रेलवे की अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया था।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इन घटनाओं में रेलवे को लगभग 93 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। कई स्थानों पर स्टेशनों में तोड़फोड़, आगजनी और रेल सेवाओं में बाधा उत्पन्न होने की घटनाएं दर्ज की गई थीं।
यूपी मॉडल जैसी कार्रवाई की चर्चा
राजनीतिक गलियारों में इस कदम की तुलना उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई दोषियों से वसूलने की नीति से की जा रही है। हालांकि पश्चिम Bengal में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और कानूनी ढांचा राज्य सरकार द्वारा तय किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नुकसान की वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो संबंधित मामलों में कानूनी जांच, पहचान और न्यायिक प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होगा।
राजनीतिक प्रतिक्रिया संभव
सीएए और उससे जुड़े विरोध प्रदर्शन पहले भी राजनीतिक विवाद का विषय रहे हैं। ऐसे में पुराने मामलों को दोबारा खोलने के फैसले पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।
सरकार का पक्ष है कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करना और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों का निष्पक्ष निपटारा करना है।
आगे क्या?
पुलिस और संबंधित एजेंसियां अब 2019 के मामलों का रिकॉर्ड एकत्र कर उनकी समीक्षा शुरू करेंगी। जांच के बाद यह तय किया जाएगा कि किन मामलों में आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किन व्यक्तियों पर आर्थिक नुकसान की भरपाई का दावा किया जा सकता है।
फिलहाल, राज्य सरकार के इस कदम को 2019 के सीएए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
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