
कोहिनूर हीरे पर ममदानी का बयान: किंग चार्ल्स से लौटाने की अपील की बात
अमेरिका दौरे पर ब्रिटिश सम्राट से मुलाकात से पहले न्यूयॉर्क मेयर का बयान, भारत पहले भी उठा चुका है मुद्दा
न्यूयॉर्क/नई दिल्ली, 1 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने कोहिनूर हीरे को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें ब्रिटेन के सम्राट किंग चार्ल्स तृतीय से अलग से बातचीत का अवसर मिलता, तो वह उन्हें कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने के लिए प्रेरित करते। यह बयान ऐसे समय आया है जब किंग चार्ल्स अमेरिका की राजकीय यात्रा पर हैं और कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं।
ममदानी ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही। उनसे पूछा गया था कि वह किंग चार्ल्स से मुलाकात के दौरान क्या मुद्दा उठाएंगे। इसके जवाब में उन्होंने स्पष्ट कहा, “अगर मुझे उनसे अलग से बात करने का मौका मिलता, तो मैं उन्हें कोहिनूर हीरा लौटाने के लिए प्रोत्साहित करता।”
किंग चार्ल्स की इस अमेरिका यात्रा के दौरान कई उच्च-स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस की संयुक्त बैठक को संबोधित किया, जो किसी विदेशी सम्राट के लिए एक अहम कूटनीतिक अवसर माना जाता है। इसके अलावा, उन्हें और महारानी क्वीन कैमिला को व्हाइट हाउस में आयोजित राजकीय रात्रिभोज में सम्मानित किया गया, जिसकी मेजबानी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने की।
न्यूयॉर्क दौरे के प्रमुख पड़ाव
न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला ने 9/11 मेमोरियल का दौरा किया और 2001 के आतंकी हमलों में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी। इसी स्थल पर ममदानी और किंग चार्ल्स की मुलाकात भी हुई।
इसके अलावा, शाही दंपत्ति ने हार्लेम क्षेत्र में स्थित ‘Harlem Grown’ नामक शहरी खेती नेटवर्क का भी दौरा किया, जो बच्चों और परिवारों के लिए सामुदायिक समर्थन और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में काम करता है।
कोहिनूर हीरे का इतिहास और विवाद
कोहिनूर हीरा, जिसका वजन लगभग 105.6 कैरेट है, विश्व के सबसे प्रसिद्ध और विवादित हीरों में से एक है। यह मूल रूप से भारत में पाया गया था और समय के साथ कई शासकों के हाथों से गुजरता हुआ ब्रिटिश शाही खजाने का हिस्सा बना।
1849 में सिख साम्राज्य के अंतिम शासक महाराजा दलीप सिंह द्वारा इसे ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंपा गया था, जिसके बाद यह ब्रिटेन पहुंचा। 1937 में इसे महारानी के मुकुट में जड़ा गया, और वर्तमान में यह लंदन के टॉवर ऑफ लंदन में सुरक्षित रखा गया है।
इतिहासकारों के अनुसार, इस हीरे के स्वामित्व को लेकर लंबे समय से विवाद चलता आ रहा है। इसके पूर्व मालिकों में मुगल सम्राट, ईरान के शाह, अफगान अमीर और सिख शासक शामिल रहे हैं।
भारत का रुख
भारत सरकार समय-समय पर ब्रिटेन से कोहिनूर हीरे की वापसी की मांग उठाती रही है। भारतीय पक्ष का कहना है कि यह हीरा औपनिवेशिक काल में देश से बाहर ले जाया गया था और इसे वापस लाया जाना चाहिए।
सरकार ने कई बार संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे का समाधान कूटनीतिक और कानूनी माध्यमों से तलाशने के प्रयास जारी रखेगी। हालांकि, अब तक इस दिशा में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।
राजनीतिक और कूटनीतिक संकेत
ममदानी का यह बयान औपचारिक नीति का हिस्सा नहीं है, लेकिन यह पश्चिमी देशों में भी उपनिवेशकालीन विरासत और सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी को लेकर बढ़ती बहस को दर्शाता है। हाल के वर्षों में कई देशों ने अपने ऐतिहासिक कलाकृतियों और धरोहरों की वापसी की मांग तेज की है।
आगे की राह
कोहिनूर हीरे का मुद्दा केवल ऐतिहासिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक संवेदनाओं से भी जुड़ा है। ममदानी जैसे नेताओं के बयान इस बहस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाए रखते हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या भारत और ब्रिटेन इस विषय पर किसी सहमति तक पहुंच पाते हैं या यह विवाद यूं ही जारी रहता है।

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