
मधुबनी डीएम का सख्त आदेश: निजी स्कूलों की मनमानी फीस और बंधनकारी खरीद पर रोक
मधुबनी (डॉ. मुहम्मद सैफ़ुद्दीन): जिले में निजी विद्यालयों द्वारा फीस वसूली और स्कूल सामग्री की अनिवार्य खरीद को लेकर मिल रही लगातार शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला पदाधिकारी (डीएम) मधुबनी ने इस संबंध में स्पष्ट आदेश जारी करते हुए सभी निजी स्कूलों को नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।
प्रशासन को मिली शिकायतों के अनुसार कई निजी विद्यालय री-एडमिशन, ड्रेस, पुस्तक, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क समेत विभिन्न मदों के नाम पर अभिभावकों से भारी राशि वसूल रहे थे। इसके अलावा, स्कूल प्रबंधन द्वारा यूनिफॉर्म, किताबें और अन्य सामग्री के लिए तय दुकानों से ही खरीदारी करने का दबाव बनाया जा रहा था, जिससे अभिभावकों को महंगे दामों पर सामान खरीदना पड़ रहा था।
डीएम ने अपने आदेश में कहा है कि शिक्षा को व्यवसाय के रूप में चलाने की यह प्रवृत्ति गंभीर और आपत्तिजनक है तथा इस पर तत्काल नियंत्रण आवश्यक है।
नियमों के पालन के निर्देश
जारी आदेश में सभी निजी विद्यालयों को निम्नलिखित कानूनों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है—
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009
- बिहार विद्यालय परिवहन संचालन विनियम, 2020
- बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम, 2019
इसके तहत स्कूलों को सभी प्रकार की फीस (प्रवेश, पुनर्नामांकन, मासिक, वार्षिक आदि) का पूरा विवरण स्कूल के सूचना पट्ट और वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
अभिभावकों को राहत
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अभिभावक स्कूल द्वारा निर्धारित किसी विशेष दुकान से ही ड्रेस, किताबें या अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं होंगे। वे अपनी सुविधा अनुसार कहीं से भी सामान खरीद सकते हैं। ऐसा न मानने वाले विद्यालयों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
निगरानी की व्यवस्था
इस आदेश के अनुपालन की निगरानी अनुमंडल स्तर पर अनुमंडल पदाधिकारी और जिला स्तर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा की जाएगी।
तत्काल प्रभाव से लागू
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है, जिससे अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अब देखना यह होगा कि मधुबनी जिला प्रशासन के इस आदेश का जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी क्रियान्वयन हो पाता है। हालांकि, इस पहल के जरिए प्रशासन ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि शिक्षा का बढ़ता व्यवसायीकरण चिंताजनक और अनुचित है। ऐसे में जिला पदाधिकारी का यह कदम न केवल समयानुकूल है, बल्कि अभिभावकों के हित में एक सकारात्मक और सराहनीय पहल के रूप में देखा जा रहा है।

डॉ. मुहम्मद सैफ़ुद्दीन एक पत्रकार और हेल्थ राइटर हैं, जो फिटनेस, वेलनेस मैनेजमेंट और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर लेखन करते हैं। वे हिंदी न्यूज़ पोर्टल जग वाणी से जुड़े हुए हैं, जहाँ उनके लेख आम पाठकों को सरल भाषा में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, जागरूकता और जीवनशैली सुधार के व्यावहारिक सुझाव प्रदान करते हैं।
उनकी लेखन शैली शोध-आधारित और जनहित पर केंद्रित होती है, जिसमें वे आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों, शारीरिक सक्रियता, संतुलित आहार और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करते हैं। डॉ. सैफ़ुद्दीन का उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को बेहतर व स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
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