मराठी विवाद पर फडणवीस का बड़ा बयान, हिंसा नहीं चलेगी

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सीएम फडणवीस ने कहा मराठी के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी, गैर-मराठी लोगों को सीखने के लिए किया जाएगा प्रोत्साहित।


मराठी के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

टैक्सी-ऑटो चालकों के लिए मराठी अनिवार्यता विवाद के बीच सरकार का रुख स्पष्ट; भाषा पर गर्व जरूरी, लेकिन जबरदस्ती नहीं


मुंबई, 2 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): महाराष्ट्र में भाषा को लेकर चल रही बहस के बीच मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने साफ कहा है कि मराठी भाषा पर गर्व होना चाहिए, लेकिन इसके नाम पर किसी भी तरह की हिंसा या दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार गैर-मराठी लोगों को मराठी सीखने के लिए प्रोत्साहित करेगी, लेकिन किसी पर जबरदस्ती नहीं होगी।

मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने शुक्रवार को यह बयान उस विवाद के संदर्भ में दिया, जिसमें टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य करने का निर्देश जारी किया गया था। बाद में राज्य के परिवहन विभाग ने इस आदेश को वापस ले लिया।

फडणवीस ने कहा कि भाषा किसी भी समाज की पहचान होती है और हर व्यक्ति को अपनी मातृभाषा पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम सभी को अपनी मातृभाषा मराठी पर गर्व होना चाहिए। महाराष्ट्र में रहने वाले लोगों को मराठी सीखनी चाहिए। मुझे विश्वास है कि लोग इसे सीखने का प्रयास करेंगे और सरकार भी इसमें उनकी मदद करेगी।”

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भाषा के नाम पर किसी भी तरह का दबाव या हिंसा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, “किसी को सिर्फ इसलिए मारना-पीटना कि वह हमारी भाषा नहीं बोलता, यह पूरी तरह गलत है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

राज ठाकरे के बयान पर प्रतिक्रिया

यह बयान उस समय आया है जब Raj Thackeray ने मराठी भाषा को लेकर कड़ा रुख अपनाने की बात कही थी। पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ठाकरे ने कहा था कि महाराष्ट्र के लोगों को मराठी के मुद्दे पर “ज्यादा मुखर” होना चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया था कि ऑटो-रिक्शा चालक मराठी बोलने से इनकार कैसे कर सकते हैं। ठाकरे ने यह भी कहा कि क्या वे तमिलनाडु या पश्चिम बंगाल में ऐसा करने की हिम्मत दिखा सकते हैं।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए फडणवीस ने परोक्ष रूप से तंज कसते हुए कहा कि महाराष्ट्र कभी भी संकीर्ण सोच वाला राज्य नहीं रहा है। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र ने कभी यह नहीं कहा कि दूसरे राज्यों के लोग यहां न रहें या केवल कुछ खास लोग ही यहां बसें। यह राज्य हमेशा से सभी का स्वागत करता रहा है।”

भाषा और पहचान का संतुलन

मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि मराठी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही सामाजिक सौहार्द भी बनाए रखना उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि मराठी भाषी लोग न केवल महाराष्ट्र में बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। “मुझे यह देखकर खुशी होती है कि मराठी लोग अन्य राज्यों में भी अपनी संस्कृति को गर्व के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।

विवाद की पृष्ठभूमि (टाइमलाइन)

  • परिवहन विभाग ने हाल ही में टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए मराठी ज्ञान अनिवार्य करने का निर्देश जारी किया
  • इस फैसले पर विभिन्न वर्गों से प्रतिक्रिया आई
  • कुछ संगठनों ने इसे समर्थन दिया, जबकि अन्य ने इसे भेदभावपूर्ण बताया
  • बढ़ते विवाद के बाद सरकार ने यह निर्देश वापस ले लिया
  • इसी बीच Raj Thackeray ने मराठी को लेकर कड़ा बयान दिया
  • इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने संतुलित रुख अपनाते हुए हिंसा के खिलाफ स्पष्ट संदेश दिया

आगे की स्थिति

महाराष्ट्र में भाषा को लेकर यह बहस फिलहाल शांत होती नजर नहीं आ रही है, लेकिन सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। मराठी भाषा को बढ़ावा दिया जाएगा, लेकिन किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या हिंसा को सख्ती से रोका जाएगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार किस तरह से गैर-मराठी भाषी लोगों को भाषा सीखने के लिए प्रेरित करती है और सामाजिक संतुलन बनाए रखती है।


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