
कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम में ₹993 की बड़ी बढ़ोतरी, तीन महीनों में तीसरी बार झटका
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में उछाल का असर; दिल्ली में 19 किलो सिलेंडर ₹3,071 के पार, घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत
नई दिल्ली, 1 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती ऊर्जा कीमतों का असर अब भारत में भी साफ दिखाई दे रहा है। 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में शुक्रवार को एकमुश्त ₹993 की बढ़ोतरी की गई है। इसके साथ ही राजधानी दिल्ली में इसकी कीमत ₹3,071.5 तक पहुंच गई है। लगातार तीसरी बार हुई इस वृद्धि ने होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों की लागत पर दबाव बढ़ा दिया है।
तीन महीनों में तीसरी बढ़ोतरी
तेल कंपनियों द्वारा यह बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब वैश्विक स्तर पर ईंधन कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद से कमर्शियल गैस की कीमतों में यह तीसरी वृद्धि है।
मार्च की शुरुआत में लगभग ₹115 का इजाफा हुआ था। इसके बाद 1 अप्रैल को करीब ₹200 की बढ़ोतरी की गई। अब मई की शुरुआत में ₹993 की बड़ी छलांग ने कुल वृद्धि को काफी अधिक कर दिया है।
क्यों बढ़े दाम? IOCL ने दी वजह
Indian Oil Corporation Limited (IOCL) के अनुसार, इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में तेजी है।
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि वैश्विक ईंधन लागत बढ़ने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, ताकि आम जनता पर सीधा असर कम पड़े।
इसके अलावा, एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों को भी स्थिर रखा गया है, जिससे एयरलाइंस और यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत
कमर्शियल गैस की कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत दी गई है। देश के करीब 33 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि आम घरों की रसोई पर असर कम से कम रखा जाए, इसलिए घरेलू गैस दरों को स्थिर रखा गया है।
कैसे तय होते हैं गैस के दाम
एलपीजी समेत पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, विनिमय दर और अन्य कारकों के आधार पर तय होती हैं।
इन दरों की समीक्षा आम तौर पर हर पखवाड़े की जाती है। पिछला संशोधन 11 अप्रैल 2026 को लागू हुआ था। इसके बाद 1 मई से नई दरें लागू की गई हैं।
केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित शुल्क और वैश्विक औसत कीमतों के आधार पर अंतिम दरें तय की जाती हैं।
पेट्रोल–डीजल और ATF पर क्या असर?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की घरेलू कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
डीजल के निर्यात पर शुल्क ₹23 प्रति लीटर तय किया गया है, जबकि एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर ₹33 प्रति लीटर शुल्क लागू रहेगा। पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क शून्य रखा गया है।
सरकार का कहना है कि प्रमुख ईंधनों की कीमत स्थिर रखकर आम उपभोक्ताओं पर दबाव कम करने की कोशिश की गई है।
व्यापारियों पर बढ़ेगा असर
कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में इस तेज बढ़ोतरी का सीधा असर होटल, ढाबा, कैटरिंग और छोटे व्यवसायों पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि लागत बढ़ने के कारण आने वाले समय में खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे आम लोगों की जेब पर अप्रत्यक्ष असर पड़ेगा।
आगे क्या?
यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में कमर्शियल गैस की कीमतों में और बदलाव संभव है।
हालांकि, सरकार फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देने के रुख पर कायम दिख रही है। आगे की नीति वैश्विक बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगी।

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