
MP Nursing College Scam: जबलपुर हाई कोर्ट सख्त, CBI से 800 कॉलेजों का पूरा रिकॉर्ड तलब
600 अपात्र कॉलेजों पर कार्रवाई न होने पर कोर्ट नाराज; मान्यता देने वाले अधिकारियों की सूची भी मांगी
जबलपुर, 30 अप्रैल (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): मध्य प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग कॉलेज मान्यता घोटाले में जबलपुर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को राज्य के सभी 800 नर्सिंग कॉलेजों का पूरा रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने जांच में पाई गई खामियों और देरी पर भी कड़ी टिप्पणी की है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने CBI की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि जब जांच में करीब 600 कॉलेज अपात्र पाए गए, तो उनके खिलाफ अब तक कोई ठोस कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की लापरवाही शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अदालत ने CBI से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब मांगा है।
नर्सिंग काउंसिल भी घेरे में
हाई कोर्ट ने केवल जांच एजेंसी ही नहीं, बल्कि नर्सिंग काउंसिल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। अदालत ने काउंसिल को निर्देश दिया है कि वे उन सभी अधिकारियों की सूची पेश करें, जिन्होंने अपात्र कॉलेजों को मान्यता दी।
अदालत ने संकेत दिया कि इस पूरे मामले में संस्थागत स्तर पर मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
छात्रों का भविष्य अधर में
इस घोटाले के कारण प्रदेश में नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हजारों छात्रों की परीक्षाएं और परिणाम फिलहाल रोक दिए गए हैं।
हाई कोर्ट ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल परीक्षाओं और परिणामों पर लगी रोक जारी रखने का फैसला किया है। इससे छात्रों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि जिन कॉलेजों को जांच में ‘सूटेबल’ पाया गया है, उनके छात्रों को बिना ट्रांसफर किए परीक्षाएं आयोजित नहीं की जानी चाहिए।
वहीं नर्सिंग काउंसिल ने अदालत से कुछ परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने और प्रस्तावित परीक्षाएं आयोजित करने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल इस पर रोक बनाए रखी है।
अगली सुनवाई 12 मई को
हाई कोर्ट ने CBI और नर्सिंग काउंसिल को सभी जरूरी दस्तावेज और रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 12 मई तय की है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई इन रिपोर्ट्स पर निर्भर करेगी।
मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता को लेकर लंबे समय से अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप है कि कई कॉलेज बिना जरूरी संसाधनों और मानकों के ही मान्यता प्राप्त कर गए, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ा।
आगे की दिशा
हाई कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब इस मामले में तेज कार्रवाई की उम्मीद है। यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है, तो संबंधित अधिकारियों और संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई संभव है। फिलहाल छात्रों और अभिभावकों की नजर अगली सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी है।

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