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शहरी शासन सुधार पर नीति आयोग की रिपोर्ट जारी, 2047 के ‘विकसित भारत’ लक्ष्य में शहरों की भूमिका पर जोर
मेयर प्रणाली, वित्तीय स्वायत्तता और संस्थागत सुधार पर केंद्रित सुझाव; मेरठ के MSME संकट ने भी उठाए शहरी योजना पर सवाल
नई दिल्ली, 28 अप्रैल — जग वाणी न्यूज़ डेस्क: केंद्र सरकार ने भारत के शहरी भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नीति आयोग की नई रिपोर्ट जारी की है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को नीति आयोग द्वारा तैयार रिपोर्ट ‘प्रभावी शहर सरकार की ओर बढ़ते हुए – दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों के लिए रूपरेखा’ को नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में जारी किया।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य में शहरों की निर्णायक भूमिका होगी। हालांकि, इसके साथ ही शहरी शासन की वर्तमान संरचना में मौजूद कई गंभीर कमियों की ओर भी संकेत किया गया है।
शहर: विकास के इंजन, लेकिन संरचनात्मक चुनौतियों से घिरे
रिपोर्ट के अनुसार, देश के बड़े शहर आर्थिक गतिविधियों, रोजगार सृजन और नवाचार के प्रमुख केंद्र हैं। इसके बावजूद, इन शहरों का प्रशासनिक ढांचा कई स्तरों पर कमजोर है।
खंडित शासन प्रणाली, सीमित वित्तीय अधिकार और जवाबदेही की कमी जैसी समस्याएं शहरों के प्रदर्शन को प्रभावित कर रही हैं। रिपोर्ट बताती है कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण बुनियादी सेवाओं जैसे पानी, स्वच्छता और सार्वजनिक परिवहन का प्रबंधन प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है।
नीति आयोग ने सुझाव दिया है कि शहरों में अधिकार, जिम्मेदारी और संसाधनों का स्पष्ट वितरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रशासनिक दक्षता बढ़ सके।
मेरठ का उदाहरण: उद्योग जगत की चिंताएँ सामने
इसी बीच उद्योग संगठनों की ओर से भी शहरी प्रबंधन को लेकर चिंता जताई गई है। फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (FISME) की एक रिपोर्ट में मेरठ के सूक्ष्म और लघु उद्यमों की स्थिति को रेखांकित किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया विध्वंस अभियानों के कारण कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित हुए हैं। शहरी योजना में खामियों के चलते प्रभावित कारोबारियों के पास वैकल्पिक स्थान उपलब्ध नहीं हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।
FISME और मेरठ सिटीजन्स फोरम के संयुक्त अध्ययन में यह अनुमान लगाया गया था कि उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य तक पहुंचाने में मेरठ की अहम भूमिका होगी। इसके लिए शहर का सकल जिला घरेलू उत्पाद 2026-27 तक 30 बिलियन डॉलर तक पहुंचना आवश्यक है।
हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इस लक्ष्य पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
FISME की केंद्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य और उद्योगपति दिनेश सिंघल ने कहा कि शहर के मास्टर प्लान में गंभीर कमियां हैं, जिसके कारण यह स्थिति पैदा हुई है।
प्रमुख सिफारिशें: नेतृत्व और वित्तीय सुधार पर जोर
नीति आयोग की रिपोर्ट में शहरी शासन को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं।
सबसे प्रमुख प्रस्ताव सीधे निर्वाचित महापौर (मेयर) की प्रणाली को लागू करने का है, जिसे निश्चित कार्यकाल और ‘मेयर-इन-काउंसिल’ व्यवस्था का समर्थन मिलेगा। इसका उद्देश्य नेतृत्व में स्थिरता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
इसके अलावा, रिपोर्ट में नगर निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय सुझाए गए हैं:
- नगर निकायों के राजस्व स्रोतों का विस्तार
- समय पर वित्तीय हस्तांतरण
- नगरपालिका बॉन्ड जैसे बाजार आधारित वित्तीय साधनों का उपयोग
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पानी, स्वच्छता और सार्वजनिक परिवहन जैसी सेवाओं को एकीकृत कर शहर सरकारों के अधीन लाया जाए, जिससे सेवा वितरण में सुधार हो सके।
संस्थागत पुनर्गठन की आवश्यकता
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में शहरों में कई सेवा प्रदाता एजेंसियां अलग-अलग काम करती हैं, जिससे समन्वय की कमी रहती है।
इस समस्या के समाधान के लिए सुझाव दिया गया है कि इन एजेंसियों को शहर सरकार के तहत लाया जाए और उनकी भूमिकाओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जाए। इससे जवाबदेही बढ़ेगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी।
कार्यान्वयन रोडमैप: चरणबद्ध सुधार का प्रस्ताव
नीति आयोग ने इन सुधारों को लागू करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप भी प्रस्तुत किया है।
रिपोर्ट के अनुसार:
- राज्य सरकारें अपने नगरपालिका कानूनों में आवश्यक संशोधन करें
- केंद्र सरकार का आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय मॉडल नगरपालिका कानून को अपडेट करे
- सुधार लागू करने वाले राज्यों को प्रोत्साहन दिया जाए
इसके साथ ही, रिपोर्ट में चरणबद्ध तरीके से इन सुधारों को लागू करने की सिफारिश की गई है, ताकि राज्यों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करने की सुविधा मिल सके।
शहरी भारत का भविष्य नीति सुधारों पर निर्भर
नीति आयोग की यह रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि भारत के विकास का अगला चरण शहरों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
यदि शहरी शासन को अधिक सशक्त, जवाबदेह और वित्तीय रूप से सक्षम बनाया जाता है, तो यह देश की आर्थिक वृद्धि को गति दे सकता है। वहीं, मेरठ जैसे उदाहरण यह भी दिखाते हैं कि शहरी योजना की कमजोरियां सीधे उद्योग और रोजगार पर असर डाल सकती हैं।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकारें इन सिफारिशों को किस हद तक अपनाती हैं और जमीनी स्तर पर इनका कितना प्रभाव पड़ता है।

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