
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में पेट्रोल ₹97.91 और डीजल ₹90.78 प्रति लीटर पहुंच गया। जानिए नई दरें और बढ़ोतरी की वजह।
पेट्रोल-डीजल फिर महंगा: चार साल बाद तेल कंपनियों ने बढ़ाए दाम, आम आदमी पर बढ़ेगा बोझ
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और तेल कंपनियों के घाटे का असर, दिल्ली में पेट्रोल ₹97.91 और डीजल ₹90.78 प्रति लीटर पहुंचा
नई दिल्ली, 15 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने करीब चार साल बाद खुदरा ईंधन दरों में बड़ा बदलाव किया है। नई कीमतें शुक्रवार रात से लागू हो चुकी हैं। बढ़ी हुई दरों के बाद आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।
नई दरों के अनुसार पेट्रोल की कीमत में ₹3.14 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद कई शहरों में पेट्रोल की कीमत ₹97 से ऊपर पहुंच गई है। वहीं डीजल ₹3.11 प्रति लीटर महंगा हुआ है और इसकी कीमत कई स्थानों पर ₹90 प्रति लीटर के पार चली गई है।
सरकारी तेल कंपनियों की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नियमित पेट्रोल का दाम ₹94.77 से बढ़कर ₹97.91 प्रति लीटर हो गया है। वहीं नियमित डीजल ₹87.67 से बढ़कर ₹90.78 प्रति लीटर पहुंच गया है। प्रीमियम पेट्रोल की कीमत अब ₹105.14 से ₹107.14 प्रति लीटर के बीच हो गई है।
पहले ही मिल चुके थे संकेत
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने हाल के दिनों में संकेत दिए थे कि तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए खुदरा कीमतों में संशोधन जरूरी हो सकता है। उनके बयान के बाद से ही पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही थी।
सरकारी तेल कंपनियों ने दावा किया था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण उन्हें प्रतिदिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था। पेट्रोलियम मंत्री ने यह भी कहा था कि यदि खुदरा कीमतों में संशोधन नहीं किया जाता, तो एक तिमाही के भीतर तेल कंपनियों का घाटा ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो सकता था।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियों का पूरा घाटा अभी भी नहीं निकल पाएगा। इसके पीछे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतें और रुपये की कमजोरी को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
आम लोगों और परिवहन क्षेत्र पर असर
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की दैनिक जिंदगी पर पड़ता है। निजी वाहन चलाने वालों के अलावा ट्रांसपोर्ट सेक्टर, कृषि, लॉजिस्टिक्स और सार्वजनिक परिवहन की लागत भी बढ़ सकती है। इसका असर आने वाले दिनों में सब्जियों, खाद्यान्न और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिसका असर धीरे-धीरे बाजार में दिखाई देता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि उपकरणों और सिंचाई कार्यों में डीजल की बड़ी भूमिका होने के कारण किसानों की लागत भी प्रभावित हो सकती है।
चार साल बाद क्यों बढ़े दाम
तेल कंपनियों ने पिछले कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू खुदरा कीमतों में सीमित बदलाव किए थे। माना जा रहा है कि आगामी आर्थिक दबाव और कंपनियों की वित्तीय स्थिति को देखते हुए अब कीमतों में संशोधन करना जरूरी हो गया था।
विशेषज्ञों के अनुसार, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक आपूर्ति संबंधी चिंताओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया है। इसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अधिक पड़ता है।
हर सुबह तय होते हैं नए रेट
देश में पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें प्रतिदिन सुबह 6 बजे जारी की जाती हैं। इन्हीं दरों के आधार पर पूरे दिन बिक्री होती है। तेल की मूल कीमत के ऊपर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्य सरकारों का वैट, डीलर कमीशन और अन्य शुल्क जोड़े जाते हैं। यही कारण है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमत मूल लागत की तुलना में काफी अधिक दिखाई देती है।
राज्यों के अनुसार वैट की दरें अलग-अलग होने के कारण अलग शहरों में ईंधन की कीमतों में अंतर भी देखने को मिलता है।
आगे और बढ़ सकते हैं दाम?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में ईंधन कीमतों पर और दबाव बन सकता है। हालांकि सरकार महंगाई और राजनीतिक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तय करेगी।
फिलहाल, नई कीमतों ने महंगाई को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी है और परिवहन से जुड़े क्षेत्रों में लागत बढ़ने की आशंका भी तेज हो गई है।
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