नई दिल्ली, 16 सितंबर (केएनएन) पीएम विश्वकर्मा योजना ने तीन साल पूरे कर लिए हैं, जिसमें 30 लाख कारीगरों और शिल्पकारों ने निर्धारित तीन चरण की सत्यापन प्रक्रिया से गुजरने के बाद योजना का पंजीकरण लक्ष्य हासिल कर लिया है।
17 सितंबर, 2023 को शुरू की गई यह योजना 18 पहचाने गए पारंपरिक व्यापारों में लगे कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान करती है। इसके लाभों में प्रमाणपत्रों और पहचान पत्रों के माध्यम से औपचारिक मान्यता, कौशल प्रशिक्षण, टूलकिट प्रोत्साहन, रियायती ऋण, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और विपणन सहायता शामिल हैं।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के अनुसार, लगभग 24.50 लाख लाभार्थियों ने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के माध्यम से बुनियादी कौशल प्रशिक्षण पूरा किया है। प्रशिक्षण का उद्देश्य पारंपरिक कौशल को उन्नत करना और आधुनिक उपकरणों और तकनीकों के उपयोग में सुधार करना है।
क्रेडिट घटक के तहत, 6.18 लाख लाभार्थियों को 5 प्रतिशत प्रति वर्ष की रियायती ब्याज दर पर 1 लाख रुपये तक का ऋण प्राप्त हुआ है। इस घटक के तहत दी गई कुल ऋण सहायता 5,297 करोड़ रुपये है।
इस योजना ने इंडिया पोस्ट के माध्यम से लाभार्थियों को 18.15 लाख आधुनिक टूलकिट की डिलीवरी की सुविधा भी प्रदान की है। टूलकिट समर्थन का उद्देश्य कारीगरों को उनके संबंधित व्यवसायों के लिए बेहतर उपकरण प्रदान करना है।
पश्चिम बंगाल में, राज्य सरकार ने मई 2026 में पीएम विश्वकर्मा योजना को शामिल किया। अब तक, राज्य में 3,000 लाभार्थियों ने तीन चरण की सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर ली है और योजना के तहत पंजीकृत हो गए हैं, जबकि वर्तमान में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
योजना की तीसरी वर्षगांठ 17 सितंबर, 2026 को कोलकाता के धोनो धान्यो ऑडिटोरियम में मनाई जाएगी। केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, एमएसएमई राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे और अन्य केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले हैं।
कोलकाता कार्यक्रम में लाभार्थियों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र, बुनियादी कौशल प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, ऋण प्रमाण पत्र और टूलकिट का वितरण शामिल होगा। स्थानीय कारीगरों एवं शिल्पकारों द्वारा बनाये गये उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई जायेगी।
(केएनएन ब्यूरो)

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