इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्देश: राहुल गांधी से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI-ED जांच रिपोर्ट तलब

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राहुल गांधी से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI, ED और SFIO को आरोपों की पुष्टि कर 8 सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।


इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश: राहुल गांधी से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति मामले में CBI-ED से मांगी प्रगति रिपोर्ट


लखनऊ, 15 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi से जुड़े कथित आय से अधिक संपत्ति मामले में केंद्रीय एजेंसियों को अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) को आरोपों की पुष्टि करने तथा आठ सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिका कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दाखिल की गई थी।

क्या है मामला

याचिकाकर्ता ने अदालत में आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के पास उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक संपत्ति है। याचिका में यह भी कहा गया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं।

सुनवाई के दौरान CBI और ED की ओर से पेश वकीलों ने अदालत को बताया कि उन्हें शिकायत प्राप्त हो चुकी है और कानून के अनुसार आरोपों का सत्यापन किया जाएगा। अदालत ने इस पर कहा कि यदि जांच के दौरान आरोपों में प्रथम दृष्टया तथ्य पाए जाते हैं, तो संबंधित एजेंसियां कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई कर सकती हैं।

अदालत ने किन विभागों को बनाया पक्षकार

हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार के कुछ महत्वपूर्ण विभागों को भी पक्षकार बनाने की अनुमति दी है। इनमें कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), वित्त मंत्रालय के अंतर्गत राजस्व विभाग तथा कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय शामिल हैं।

अदालत ने सभी उत्तरदाताओं को निर्धारित समयसीमा के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सीलबंद रहेंगे दस्तावेज

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि याचिका से संबंधित सभी दस्तावेज न्यायालय की अभिरक्षा में सीलबंद रखे जाएंगे। इससे पहले भी कई संवेदनशील मामलों में अदालतें जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से बचाने के लिए ऐसे निर्देश देती रही हैं।

अगली सुनवाई 20 जुलाई को

खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को तय की है। तब तक जांच एजेंसियों को आरोपों के सत्यापन से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी।

राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि अभी अदालत ने केवल आरोपों के सत्यापन का निर्देश दिया है और किसी भी प्रकार की दोषसिद्धि या आपराधिक निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। ऐसे में मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच रिपोर्ट पर सभी की नजर रहेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह आदेश प्रारंभिक जांच और तथ्यों की पुष्टि की प्रक्रिया का हिस्सा है। अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आगे की न्यायिक सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।


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