
तेल कीमतों में उछाल से शेयर बाजार दबाव में, सेंसेक्स 821 अंक टूटा, निफ्टी 23,890 पर
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने निवेशकों की धारणा कमजोर की; आईटीसी, टेक महिंद्रा और मारुति ने कुछ सहारा दिया
मुंबई, 30 अप्रैल (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 821.79 अंक टूटकर 76,674.57 पर आ गया, जबकि निफ्टी 287.3 अंक गिरकर 23,890.35 पर पहुंच गया। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता ने निवेशकों के भरोसे पर दबाव बनाया है।
बुधवार को बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार खत्म किया था, लेकिन दिन के दौरान बनी बढ़त का बड़ा हिस्सा अंत तक टिक नहीं सका। आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी 0.76 प्रतिशत या 181.95 अंक चढ़कर 24,177.65 पर बंद हुआ था, जबकि सेंसेक्स 0.79 प्रतिशत या 609.45 अंक की बढ़त के साथ 77,496.36 पर बंद हुआ।
विश्लेषकों का कहना है कि तकनीकी स्तर पर निफ्टी के लिए 24,200 का स्तर एक अहम प्रतिरोध बना हुआ है। जब तक यह स्तर decisively पार नहीं होता, तब तक बाजार में सीमित दायरे में ही उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
गुरुवार की गिरावट का प्रमुख कारण वैश्विक तेल बाजार में तेजी रही। इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 3 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 114.60 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इस तेजी ने वैश्विक स्तर पर महंगाई और लागत बढ़ने की आशंका को फिर से बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर दिखा।
भू–राजनीतिक कारण और असर
तेल कीमतों में उछाल के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई बातचीत को अहम वजह माना जा रहा है। इस स्थिति से आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ी है। इसके साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात द्वारा 1 मई से ओपेक से बाहर निकलने की घोषणा ने ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ा दी है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन घटनाओं से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं। इसका असर उभरते बाजारों, खासकर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर ज्यादा पड़ता है।
चुनिंदा शेयरों का सहारा
हालांकि बाजार पर दबाव बना रहा, लेकिन कुछ दिग्गज कंपनियों ने गिरावट को सीमित रखने में भूमिका निभाई। आईटीसी, टेक महिंद्रा और मारुति सुजुकी इंडिया जैसे शेयर निफ्टी में शीर्ष पर रहे और उन्होंने सूचकांकों को कुछ सहारा दिया।
विश्लेषकों के अनुसार, आईटी और एफएमसीजी सेक्टर में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार पूरी तरह से नकारात्मक क्षेत्र में जाने से बचा।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है, जो शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत होगा।
एक वरिष्ठ विश्लेषक के अनुसार, “घरेलू संकेतक फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन वैश्विक कारक बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए और जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचना चाहिए।”
पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार काफी अस्थिर रहा है। रूस-यूक्रेन तनाव, मध्य पूर्व की स्थिति और प्रमुख तेल उत्पादक देशों के फैसलों ने कीमतों को प्रभावित किया है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे उतार-चढ़ाव से सीधे प्रभावित होता है।
आगे की दिशा
आने वाले दिनों में बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और वैश्विक राजनीतिक घटनाओं पर रहेगी। यदि इन मोर्चों पर स्थिरता आती है, तो बाजार में फिर से मजबूती लौट सकती है। फिलहाल निवेशकों के लिए सतर्क रुख अपनाना बेहतर माना जा रहा है।

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