
पति की हत्या के मामले में सोनम रघुवंशी को जमानत, पीड़ित परिवार हैरान; CBI जांच की मांग
इंदौर निवासी राजा रघुवंशी हत्याकांड में नया मोड़, परिवार हाई कोर्ट जाने की तैयारी में
इंदौर, 29 अप्रैल (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): मध्य प्रदेश के इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी मानी जा रही सोनम रघुवंशी को मेघालय की एक अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने गहरा आश्चर्य और नाराज़गी जताई है। परिवार ने अब इस फैसले को Meghalaya High Court में चुनौती देने का फैसला किया है और मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) से कराने की मांग उठाई है।
मामले का संक्षिप्त विवरण
इंदौर निवासी राजा रघुवंशी पिछले साल 23 मई को अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून पर मेघालय गए थे, जहां वे अचानक लापता हो गए। करीब 10 दिन बाद, 2 जून को उनका क्षत-विक्षत शव पूर्वी खासी हिल्स जिले के सोहरा इलाके में एक गहरी खाई के पास स्थित झरने से बरामद हुआ।
इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने सोनम रघुवंशी सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें उसका कथित प्रेमी राज कुशवाह भी शामिल था। जांच के दौरान हत्या की साजिश रचने के आरोप सामने आए।
जमानत पर परिवार की प्रतिक्रिया
राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह समझ से परे है कि जिस व्यक्ति को हत्या का “मास्टरमाइंड” बताया जा रहा है, उसे जमानत कैसे मिल सकती है।
उन्होंने भावुक होकर कहा कि,
“मेरे बेटे की बेरहमी से हत्या हुई है। हमें सिर्फ न्याय चाहिए। इतने महीनों की जांच के बाद अचानक ऐसा क्या बदल गया कि आरोपी को जमानत मिल गई?”
उन्होंने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI को जिम्मेदारी देने की मांग की।
भाई ने जताया जांच पर संदेह
राजा के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने भी जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि परिवार को अभी तक चार्जशीट की प्रति नहीं दी गई है, जिससे मामले को समझना मुश्किल हो रहा है।
उनके अनुसार, “सोनम के वकील ने अदालत में यह तर्क दिया कि गिरफ्तारी के समय उन्हें कारणों की सही जानकारी नहीं दी गई थी, जो कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। इसी आधार पर जमानत मिली।”
विपिन ने जांच में संभावित “हेरफेर” की आशंका भी जताई और कहा कि परिवार इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देगा।
पुलिस जांच और चार्जशीट
मेघालय पुलिस ने इस मामले की लगभग 9 महीनों तक जांच की थी। सितंबर 2025 में पुलिस ने करीब 790 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सोनम रघुवंशी और उसके कथित प्रेमी समेत कुल 8 लोगों को आरोपी बनाया गया।
सोनम को 9 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वह शिलॉन्ग जिला जेल में न्यायिक हिरासत में रही और लगभग 10 महीने बाद अब उसे जमानत मिली है।
कानूनी और सामाजिक सवाल
इस मामले में जमानत मिलने के बाद कई कानूनी और सामाजिक सवाल उठ रहे हैं। क्या जांच प्रक्रिया में कोई कमी रही? क्या आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन हुआ? या फिर यह केवल कानूनी प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जमानत का मतलब दोषमुक्ति नहीं होता, बल्कि यह केवल सुनवाई के दौरान अस्थायी राहत होती है।
आगे की राह
परिवार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे न्याय के लिए हर संभव कानूनी रास्ता अपनाएंगे। Meghalaya High Court में अपील के साथ-साथ CBI जांच की मांग इस मामले को और लंबा खींच सकती है।
यदि उच्च न्यायालय इस मामले में हस्तक्षेप करता है, तो जांच की दिशा और कानूनी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव संभव हैं।

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