
वांगचुक की लेह वापसी, बंदियों को राहत की मांग
NSA हटने के बाद बोले सोनम वांगचुक, लद्दाख आंदोलन शांति के रास्ते पर रहेगा
लेह, 23 मार्च: राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत करीब छह महीने की हिरासत से रिहा होने के बाद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक रविवार, 22 मार्च 2026 को लेह लौटे। लेह पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लद्दाख का आंदोलन आगे भी शांतिपूर्ण रहेगा और अब टकराव नहीं, बल्कि संवाद और भरोसे का माहौल बनना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि आंदोलन से जुड़े जिन लोगों पर अब भी मामले चल रहे हैं या जो जेल में हैं, उन्हें जल्द राहत दी जाए।
कुशोक बाकुला रिनपोछे एयरपोर्ट पर वांगचुक के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। लेह एपेक्स बॉडी (LAB), करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) और उनके समर्थकों ने उनका अभिनंदन किया। यह वापसी केवल एक व्यक्ति की रिहाई के रूप में नहीं, बल्कि लद्दाख के मौजूदा राजनीतिक-सामाजिक माहौल में एक नए मोड़ के रूप में देखी जा रही है।
मीडिया से बातचीत में वांगचुक ने कहा कि हालिया घटनाओं को हार या जीत के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह समय एक नई शुरुआत का है। उन्होंने कहा कि अगर एक पक्ष एक कदम आगे बढ़े, तो दूसरा पक्ष भी और खुलापन दिखाए। उनका संकेत साफ था कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों का समाधान केवल टकराव से नहीं, बल्कि आपसी लचीलापन और रचनात्मक बातचीत से निकल सकता है।
वांगचुक ने माना कि लद्दाख में “बहुत कुछ गलत हुआ”, लेकिन अब अतीत की गलतियों में अटकने के बजाय उन्हें सुधारने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सीखना, आगे बढ़ना और हालात को बेहतर बनाना बदले की भावना से अधिक जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि लद्दाख के बड़े सवालों के समाधान के लिए है।
उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों का मुद्दा उठाया जो लद्दाख आंदोलन के दौरान गिरफ्तार हुए या जिनके खिलाफ अब भी कानूनी कार्रवाई जारी है। वांगचुक ने उम्मीद जताई कि बदलते माहौल के बीच ऐसे लोगों को भी राहत मिलेगी और उनके मामलों को निष्पक्ष तरीके से देखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जो लोग अब भी जेल में हैं या मुकदमों का सामना कर रहे हैं, उनके लिए भी “नई सुबह” आनी चाहिए।
वांगचुक ने आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया है, उनके प्रति सम्मान जताना जरूरी है। साथ ही जो घायल हुए, उन्हें फिर से काम और सामान्य जीवन में लौटाने के लिए मदद की जानी चाहिए। उनके अनुसार, यही उन कुर्बानियों का सही सम्मान होगा। इस बयान से साफ है कि वह आंदोलन को सिर्फ राजनीतिक मांगों तक सीमित नहीं, बल्कि मानवीय पीड़ा और सामाजिक न्याय के नजरिये से भी देख रहे हैं।
ताजा विरोध प्रदर्शनों की संभावना पर पूछे गए सवाल पर वांगचुक ने कहा कि वह ऐसी स्थिति नहीं आने देना चाहते। फिर भी, यदि भविष्य में आंदोलन की जरूरत पड़ी तो वह सत्य, शांति और संयम के रास्ते पर ही चलेगा। उन्होंने साफ कहा कि आंदोलन अपने मूल स्वभाव से शांतिपूर्ण रहेगा और उसमें हिंसा या भड़काव की कोई जगह नहीं होगी।
रिहाई के बाद वांगचुक ने पहले भी कहा था कि उनकी नजर में यह फैसला “विन-विन” स्थिति की शुरुआत हो सकता है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार ने भरोसा बहाली और सार्थक संवाद के लिए हाथ बढ़ाया है, और अब जरूरत इस बात की है कि सभी पक्ष इस मौके को गंभीरता से लें। उनके हालिया बयान भी इसी रुख को आगे बढ़ाते दिखे, जहां उन्होंने एक सकारात्मक और “गिव एंड टेक” वाले माहौल की बात की।
पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को हिरासत में लिया गया था। यह कार्रवाई उस समय हुई थी जब लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर आंदोलन उग्र हो गया था। उस दौर में हिंसा भी हुई, जिसमें चार लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। बाद में उन्हें जोधपुर सेंट्रल जेल भेजा गया। केंद्र सरकार ने 14 मार्च 2026 को उनका NSA निरुद्धीकरण तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया। गृह मंत्रालय ने कहा था कि यह कदम लद्दाख में शांति, स्थिरता और सभी पक्षों के बीच सार्थक संवाद का माहौल बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
लेह लौटने पर भी वांगचुक ने अपने संदेश में टकराव के बजाय संयम, धैर्य और सामूहिकता पर जोर दिया। भीड़ द्वारा उन्हें “शेर” कहे जाने पर उन्होंने खुद की तुलना “गधे” से की, जिसे उन्होंने धैर्य, सेवा और सहनशीलता का प्रतीक बताया। साथ ही उन्होंने चींटियों से सामूहिक श्रम और समुदाय के लिए त्याग की प्रेरणा लेने की बात कही। यह टिप्पणी उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व के उस पक्ष को भी दिखाती है जिसमें वे प्रतीकों के माध्यम से बड़ा सामाजिक संदेश देने की कोशिश करते हैं।
फिलहाल, वांगचुक की वापसी ने लद्दाख की राजनीति और जनआंदोलन दोनों में नई चर्चा शुरू कर दी है। LAB और KDA पहले से ही संवाद की प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी रिहाई और फिर लेह वापसी को इस रूप में देखा जा रहा है कि आगे के दिनों में बातचीत का रास्ता और मजबूत हो सकता है। हालांकि, असली परीक्षा इस बात की होगी कि लंबित मामलों, बंदियों को राहत, मृतकों के परिवारों के सम्मान, घायलों के पुनर्वास और लद्दाख की मूल राजनीतिक मांगों पर कितनी ठोस प्रगति होती है। अभी के लिए इतना साफ है कि वांगचुक ने संघर्ष की भाषा को फिर से संवाद और शांति की भाषा में बदलने की कोशिश की है।
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Keywords: सोनम वांगचुक, लद्दाख आंदोलन, NSA, लेह, LAB, KDA, जोधपुर सेंट्रल जेल
Web Title: sonam-wangchuk-returns-leh-after-nsa-revocation-ladakh
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ग़ज़नफ़र एक प्रतिष्ठित पत्रकार, लेखक, शोधकर्ता और मीडिया सलाहकार हैं। उनके पास पत्रकारिता के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है और उन्होंने विभिन्न मीडिया आउटलेट्स के साथ काम किया है। ग़ज़नफ़र की लेखन शैली सरल, प्रभावशाली और सूचनात्मक है, जो उन्हें पाठकों के बीच लोकप्रिय बनाती है। ग़ज़नफ़र की रचनात्मकता और विश्लेषणात्मक क्षमता उनके लेखन और शोध में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। वे विभिन्न विषयों पर लिखते हैं और विभिन्न संगठनों को मीडिया से सम्बंधित विषयों पर परामर्श प्रदान करते हैं।
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