गौरक्षा के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, हर जिले में तैनात होंगे ‘नोडल ऑफिसर’
नई दिल्ली: देश में गौरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा और मुस्लिम-दलित विरोधी घटनाओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ा प्रहार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि गौरक्षा के नाम पर कानून हाथ में लेना और हिंसा फैलाना कतई स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने इस पर रोक लगाने के लिए सरकारों को ठोस व्यवस्था बनाने का आदेश दिया है।
हर जिले में होगी नोडल अफसर की नियुक्ति
अदालत ने देश के प्रत्येक जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने और इस प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए एक विशेष तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया है:
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नोडल ऑफिसर: हर जिले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को बतौर ‘नोडल ऑफिसर’ नियुक्त किया जाएगा।
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समय सीमा: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को इन अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
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जवाबदेही: ये अधिकारी गौरक्षा के नाम पर सक्रिय हिंसक संगठनों और व्यक्तियों पर कड़ी निगरानी रखेंगे।
केंद्र और राज्यों को सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों को निर्देशित किया है कि वे गौ सेवा के नाम पर कानून को अपने हाथ में लेने वाले संगठनों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी संगठन या व्यक्ति को गौ सेवा के नाम पर समाज में हिंसा या नफरत फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह कदम हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में हुई मॉब लिंचिंग और प्रताड़ना की घटनाओं को देखते हुए उठाया गया है।

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