AI साइबर फ्रॉड पर केंद्र की चेतावनी, डीपफेक से बढ़ा खतरा

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केंद्र सरकार ने AI आधारित साइबर ठगी और डीपफेक खतरे को लेकर चेतावनी जारी की। नागरिकों और वित्तीय संस्थानों को सतर्क रहने की सलाह।


AI आधारित साइबर ठगी का बढ़ता खतरा, केंद्र सरकार ने जारी की चेतावनी

डीपफेक और सिंथेटिक पहचान के जरिए वित्तीय सिस्टम को निशाना बना रहे साइबर अपराधी, नागरिकों और वित्तीय संस्थानों को सतर्क रहने की सलाह


नई दिल्ली, 12 जून ((जग वाणी न्यूज़ डेस्क): देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच केंद्र सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित धोखाधड़ी को लेकर नई चेतावनी जारी की है। गृह मंत्रालय के तहत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने कहा है कि साइबर अपराधी अब उन्नत AI तकनीकों का इस्तेमाल कर सुरक्षा प्रणालियों को चकमा दे रहे हैं और वित्तीय ढांचे को निशाना बना रहे हैं।

जारी एडवाइजरी के अनुसार, अपराधी डीपफेक वीडियो और सिंथेटिक पहचान (Synthetic Identity) जैसी तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। इन तकनीकों की मदद से वे चेहरे की पहचान, लाइवनेस वेरिफिकेशन, वीडियो केवाईसी (KYC), अकाउंट रिकवरी सिस्टम और डिजिटल सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं।

कैसे काम कर रहे हैं साइबर अपराधी?

एडवाइजरी में बताया गया है कि ठग आमतौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, जॉब पोर्टल, डेटिंग ऐप्स या फोन कॉल के माध्यम से लोगों से संपर्क स्थापित करते हैं। बातचीत के दौरान वे लोगों का चेहरा, आवाज और अन्य बायोमेट्रिक जानकारी जुटाने का प्रयास करते हैं।

कई मामलों में अपराधी लोगों को कैमरे के सामने आंख झपकाने, सिर घुमाने या कुछ वाक्य बोलने के लिए कहते हैं। बाद में इसी डेटा का उपयोग कर डीपफेक सामग्री तैयार की जाती है, जिससे सुरक्षा प्रणालियों को भ्रमित किया जा सके।

वित्तीय संस्थानों के लिए विशेष निर्देश

केंद्र सरकार ने बैंकों, फिनटेक कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने का निर्देश दिया है। एडवाइजरी में कहा गया है कि ग्राहक सत्यापन और ऑनबोर्डिंग प्रक्रियाओं में डीपफेक पहचानने वाली तकनीकों को शामिल किया जाए।

साथ ही, वीडियो केवाईसी और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से जुड़े सुरक्षा उपायों की नियमित समीक्षा करने की भी सलाह दी गई है, ताकि नई तकनीकों का दुरुपयोग रोका जा सके।

नागरिकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

सरकार ने आम नागरिकों से भी विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। लोगों को अपनी बायोमेट्रिक जानकारी और चेहरे से जुड़े डेटा को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।

एडवाइजरी में कहा गया है कि किसी भी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध प्लेटफॉर्म पर वीडियो रिकॉर्डिंग, चेहरे की स्कैनिंग या पहचान संबंधी जानकारी साझा करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, बैंक खातों और डिजिटल सेवाओं से जुड़े ईमेल तथा एसएमएस अलर्ट पर नियमित नजर रखनी चाहिए।

संदिग्ध गतिविधि की तुरंत करें शिकायत

सरकार ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की संदिग्ध वित्तीय गतिविधि या साइबर धोखाधड़ी का संदेह हो तो उसकी तत्काल रिपोर्ट करनी चाहिए। इसके लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का उपयोग किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक जहां कई क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर रही है, वहीं इसके दुरुपयोग से साइबर अपराधों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। ऐसे में नागरिकों, वित्तीय संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वित सतर्कता ही इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका होगी।

आगे की चुनौती

डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन बैंकिंग और दूरस्थ पहचान सत्यापन के बढ़ते उपयोग के साथ AI आधारित साइबर हमलों का जोखिम भी बढ़ रहा है। केंद्र सरकार की यह एडवाइजरी इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए जारी की गई है, ताकि समय रहते सुरक्षा उपाय मजबूत किए जा सकें और नागरिकों को संभावित वित्तीय नुकसान से बचाया जा सके।


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