अलीगढ़ हादसा: सड़क धंसने से मजदूर की मौत

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अलीगढ़ में पाइपलाइन मरम्मत के दौरान सड़क धंसी, मजदूर की मौत; सीएम योगी ने दिए जांच के आदेश

सीसीटीवी वीडियो वायरल होने के बाद बढ़ा जनाक्रोश, 3 सदस्यीय जांच समिति गठित, परिवार को 5 लाख रुपये सहायता


अलीगढ़, 26 अप्रैल : उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक दर्दनाक हादसे ने श्रमिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के व्यस्त रेलवे रोड क्षेत्र में पाइपलाइन मरम्मत के दौरान अचानक सड़क धंसने से 30 वर्षीय मजदूर की मिट्टी में दबकर मौत हो गई। घटना का सीसीटीवी वीडियो सामने आने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने जांच के आदेश दिए हैं।

यह हादसा शनिवार दोपहर उस समय हुआ जब रेलवे रोड स्थित व्यस्त बाजार इलाके में पेयजल पाइपलाइन की मरम्मत का काम चल रहा था। इसी दौरान खुदाई किए गए गड्ढे का एक हिस्सा अचानक धंस गया, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर महिंदर सिंह (30) मलबे में दब गए। मौके पर मौजूद लोगों और सहकर्मियों ने तुरंत उन्हें निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

पुलिस के अनुसार, सूचना मिलते ही राहत टीम मौके पर पहुंची और मलबे से मजदूर को बाहर निकाला गया। हालांकि, दम घुटने के कारण उनकी हालत गंभीर हो चुकी थी। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

वायरल वीडियो और बढ़ता आक्रोश

घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह अचानक मिट्टी का ढेर मजदूर पर गिरता है और साथी उसे बचाने के लिए चीखते-चिल्लाते हुए मदद की गुहार लगाते हैं। इस दृश्य ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स ने श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई है। लोगों का कहना है कि इस तरह के कार्यों में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं किए जाते, जिससे मजदूरों की जान जोखिम में रहती है।

परिवार का आरोप और स्थानीय नाराजगी

मृतक के परिजनों ने संबंधित विभाग और ठेकेदारों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मजदूरों को खतरनाक परिस्थितियों में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि उनकी सुरक्षा के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए जाते। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि मजदूरों की शिकायतों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।

स्थानीय निवासियों ने भी शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अलीगढ़ की कई सड़कों पर खुदाई के बाद उचित मरम्मत नहीं की गई है। कई जगहों पर बैरिकेडिंग की कमी और अधूरे कार्य दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं।

योजना पर उठे सवाल

यह हादसा अलीगढ़ नगर निगम की महत्वाकांक्षी ‘सीएम ग्रिड योजना’ के तहत चल रहे कार्यों के बीच हुआ है। इस योजना का उद्देश्य प्रमुख सड़कों को आधुनिक और सुगम बनाना है। हालांकि, इस घटना ने जमीनी स्तर पर इसके क्रियान्वयन की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रोजेक्ट्स में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन जरूरी है। मजदूरों के लिए सुरक्षात्मक उपकरण, उचित प्रशिक्षण और कार्यस्थल पर निगरानी अनिवार्य होनी चाहिए।

सरकारी कार्रवाई

घटना के बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जो हादसे के कारणों की जांच करेगी और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करेगी।

इसके अलावा, राज्य सरकार ने मृतक के परिजनों को 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

अलीगढ़ की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि श्रमिक सुरक्षा और शहरी विकास परियोजनाओं की निगरानी से जुड़े बड़े सवालों को उजागर करती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच समिति अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष देती है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है। साथ ही, क्या प्रशासन भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाता है या नहीं।


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