
बिहार में मखाना खेती को बढ़ावा: उत्पादन से मार्केटिंग तक भारी सब्सिडी, किसानों के लिए बड़ा अवसर
राष्ट्रीय मखाना बोर्ड की नई योजना 2026-27 लागू, प्रसंस्करण इकाइयों पर करोड़ों तक सहायता; रोजगार सृजन पर भी फोकस
पटना, 27 अप्रैल — जग वाणी न्यूज़ डेस्क: बिहार सरकार ने मखाना उत्पादन को संगठित उद्योग का रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राष्ट्रीय मखाना बोर्ड के तहत “मखाना विकास योजना” शुरू की गई है। इस योजना में खेती से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक किसानों और उद्यमियों को व्यापक सब्सिडी देने का प्रावधान है। सरकार का उद्देश्य मखाना सेक्टर को मजबूत कर किसानों की आय बढ़ाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
योजना का दायरा और उद्देश्य
मखाना बिहार की पहचान और अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। राज्य देश में मखाना उत्पादन में अग्रणी है। नई योजना का लक्ष्य इस पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, वैल्यू एडिशन बढ़ाना और वैश्विक बाजार में इसकी पहुंच सुनिश्चित करना है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, योजना का फोकस तीन मुख्य क्षेत्रों पर है—उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन। इन तीनों स्तरों पर वित्तीय सहायता देकर पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा।
किसानों को सीधी आर्थिक सहायता
योजना के तहत मखाना उत्पादन के लिए किसानों को अधिकतम 71,600 रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इसका उपयोग आधुनिक खेती तकनीकों, बेहतर बीज और संसाधनों पर किया जा सकेगा।
इसके अलावा, खेत स्तर पर उत्पाद प्रबंधन इकाई स्थापित करने के लिए 2 लाख रुपये तक की सहायता तय की गई है। इससे फसल की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता में सुधार की उम्मीद है।
प्रसंस्करण इकाइयों पर करोड़ों की सब्सिडी
मखाना को उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए प्रसंस्करण इकाइयों पर विशेष जोर दिया गया है। योजना के तहत अलग-अलग श्रेणियों में सब्सिडी तय की गई है:
- सूक्ष्म इकाई: 5 लाख रुपये तक
- लघु इकाई: 19.5 लाख रुपये तक
- मध्यम इकाई: 1.5 करोड़ रुपये तक
- बड़ी इकाई: 3.5 करोड़ रुपये तक
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
विपणन और ब्रांडिंग पर भी फोकस
सरकार ने मखाना के बाजार विस्तार के लिए भी कई प्रावधान किए हैं। मखाना बिक्री केंद्र की स्थापना के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भागीदारी के लिए 25 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है, ताकि उत्पाद को वैश्विक मंच मिल सके।
इसके अलावा, निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) पर 2.5 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। ब्रांडिंग और मार्केटिंग गतिविधियों के लिए भी 25 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार का दृष्टिकोण
राज्य सरकार का मानना है कि मखाना केवल एक फसल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का साधन है। एक अधिकारी ने बताया कि इस योजना से किसानों को बेहतर दाम मिलने के साथ-साथ मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) भी बढ़ेगा।
सरकार का लक्ष्य मखाना को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक ब्रांड के रूप में स्थापित करना है।
रोजगार और उद्योग के अवसर
मखाना विकास योजना से कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। प्रसंस्करण इकाइयों, बिक्री केंद्रों और सप्लाई चेन के विस्तार से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित हो सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं के लिए यह योजना स्वरोजगार का एक नया विकल्प बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो बिहार मखाना उद्योग में देश का अग्रणी केंद्र बन सकता है।
कैसे करें आवेदन
इच्छुक किसान और उद्यमी इस योजना का लाभ लेने के लिए बिहार कृषि ऐप के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल और सरल बनाने का दावा किया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में मखाना की खेती लंबे समय से की जाती रही है। लेकिन अब तक यह क्षेत्र पूरी तरह संगठित नहीं हो पाया था। बिचौलियों की भूमिका और सीमित प्रोसेसिंग सुविधाओं के कारण किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल पाता था।
नई योजना इन चुनौतियों को दूर करने की दिशा में एक प्रयास है। यदि योजना सफल रही, तो यह कृषि क्षेत्र में एक मॉडल के रूप में भी उभर सकती है।
आगे की दिशा
मखाना विकास योजना बिहार के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है। उत्पादन से लेकर निर्यात तक पूरे तंत्र को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।
अब इस योजना की सफलता काफी हद तक इसके क्रियान्वयन और किसानों की भागीदारी पर निर्भर करेगी। यदि दोनों पहलू संतुलित रहे, तो आने वाले वर्षों में बिहार का मखाना वैश्विक बाजार में मजबूत पहचान बना सकता है।

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