
ईरान ने मिस्र और तुर्की से की बातचीत, युद्धविराम और कूटनीति पर जोर
अमेरिका-इजराइल संघर्ष के बीच ईरान ने क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की कोशिशें तेज कीं, बातचीत में भरोसे का संकट बना प्रमुख मुद्दा
तेहरान, 26 अप्रैल — (तसनीम न्यूज़): मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने कूटनीतिक प्रयासों को तेज करते हुए मिस्र और तुर्की के साथ उच्चस्तरीय बातचीत की है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi ने अपने मिस्र और तुर्की समकक्षों से फोन पर चर्चा कर युद्धविराम, क्षेत्रीय हालात और चल रही वार्ताओं पर विचार-विमर्श किया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और इजराइल के साथ तनावपूर्ण संबंधों के कारण क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है।
शनिवार रात हुई बातचीत में Abbas Araqchi और मिस्र के विदेश मंत्री Badr Abdelatty के बीच कूटनीतिक प्रयासों और युद्धविराम को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। साथ ही, अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए गए सैन्य अभियान के प्रभावों पर भी चर्चा की गई।
इसके अलावा, ईरानी विदेश मंत्री ने तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan से भी अलग से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने युद्धविराम की वर्तमान स्थिति और क्षेत्र में चल रहे कूटनीतिक प्रयासों की जानकारी साझा की। तुर्की, जो क्षेत्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाता है, ने शांति बहाली के प्रयासों का समर्थन जताया है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। ईरान ने इसे “अकारण आक्रामक युद्ध” करार दिया। इस संघर्ष के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Seyed Ali Khamenei और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबर सामने आई, जिसने हालात को और गंभीर बना दिया।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई हफ्तों तक मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों का निशाना अमेरिकी और इजराइली सैन्य ठिकाने रहे, जो कथित तौर पर कब्जे वाले क्षेत्रों और पर्शियन गल्फ इलाके में स्थित थे। ईरान का दावा है कि उसने 40 दिनों में 100 चरणों में जवाबी हमले कर भारी नुकसान पहुंचाया।
युद्धविराम और वार्ता प्रयास
लगातार बढ़ते तनाव के बीच 8 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो सप्ताह का युद्धविराम लागू किया गया। इसके बाद इस्लामाबाद में बातचीत शुरू हुई, जहां ईरान ने 10 बिंदुओं का प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव में अमेरिकी सैनिकों की वापसी और आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने जैसी प्रमुख मांगें शामिल थीं।
हालांकि, 11 और 12 अप्रैल को चली करीब 21 घंटे की वार्ता के बाद भी कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। ईरानी प्रतिनिधियों ने कहा कि अमेरिका पर भरोसे की कमी सबसे बड़ी बाधा है। उनका कहना था कि वाशिंगटन के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए उसकी प्रतिबद्धताओं पर विश्वास करना कठिन है।
विवाद और मौजूदा स्थिति
ईरान ने साफ किया है कि वह तभी आगे की वार्ता में शामिल होगा जब अमेरिका समुद्री नाकाबंदी हटाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह नाकाबंदी युद्धविराम का उल्लंघन है और इससे बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल सैन्य नहीं बल्कि कूटनीतिक चुनौती भी है। क्षेत्रीय शक्तियों के बीच बढ़ती बातचीत इस बात का संकेत है कि संघर्ष को सीमित रखने और समाधान खोजने की कोशिशें जारी हैं।
आगे की दिशा
मौजूदा हालात में ईरान, मिस्र और तुर्की के बीच संवाद बढ़ना एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हालांकि, जब तक भरोसे का संकट दूर नहीं होता और प्रमुख मांगों पर सहमति नहीं बनती, तब तक स्थायी समाधान की संभावना कम नजर आती है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास युद्ध को रोकने में सफल होते हैं या क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है।

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