बिहार में ई-फार्मेसी के खिलाफ 40 हजार मेडिकल दुकानें बंद, 30 करोड़ का कारोबार प्रभावित

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ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में बिहार की 40 हजार मेडिकल दुकानें बंद रहीं। पटना से दरभंगा तक दिखा हड़ताल का असर, करोड़ों का कारोबार प्रभावित।


30 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित, ई-फार्मेसी के विरोध में बिहार की 40 हजार मेडिकल दुकानें बंद

ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ दवा कारोबारियों की देशव्यापी हड़ताल, पटना से दरभंगा तक दिखा असर


पटना, 21 मई  (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के विरोध में बुधवार को बिहार समेत देशभर में दवा दुकानदारों ने 24 घंटे की हड़ताल की। ‘ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स’ (AIOCD) के आह्वान पर आयोजित इस बंद का बिहार में व्यापक असर देखने को मिला। राज्यभर में करीब 40 हजार मेडिकल दुकानें बंद रहीं, जिससे लगभग 30 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ने का अनुमान है।

दवा कारोबारियों ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन दवा कंपनियां भारी छूट देकर पारंपरिक मेडिकल दुकानों के कारोबार को नुकसान पहुंचा रही हैं। उनका कहना है कि ई-फार्मेसी के संचालन में कई अनियमितताएं हैं और बिना पर्याप्त निगरानी के दवाओं की बिक्री की जा रही है।

पटना में सबसे अधिक असर

राजधानी पटना में इस बंद का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिला। अनुमान के अनुसार, शहर में 15 से 18 करोड़ रुपये तक का कारोबार प्रभावित हुआ। पटना की साढ़े सात हजार से अधिक दवा दुकानें बंद रहीं।

गोविंद मित्रा रोड स्थित राज्य के सबसे बड़े थोक दवा बाजार में अधिकांश दुकानें पूरे दिन बंद रहीं। यहां दवा कारोबारियों ने रैली निकालकर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया।

दवा विक्रेताओं का कहना है कि ई-फार्मेसी कंपनियां बड़े स्तर पर बाजार पर कब्जा करने की कोशिश कर रही हैं, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के मेडिकल दुकानदारों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।

जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं रहीं चालू

हालांकि हड़ताल के दौरान जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को बंद से बाहर रखा गया। सरकारी और निजी अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर, नर्सिंग होम, जन औषधि केंद्र और इमरजेंसी दवा सेवाएं सामान्य रूप से खुली रहीं।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य मरीजों को परेशानी में डालना नहीं, बल्कि सरकार तक अपनी मांग पहुंचाना है। इसी वजह से जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अस्पताल परिसरों में मेडिकल स्टोर खुले रखे गए।

दरभंगा में भी सन्नाटा

दरभंगा जिले में भी हड़ताल का व्यापक असर दिखाई दिया। शहर की प्रमुख दवा मंडी बेंता में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा। सैकड़ों मेडिकल दुकानें बंद रहीं, जिससे आम लोगों को दवाएं खरीदने में परेशानी हुई।

केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री वर्तमान में कई जगहों पर गैरकानूनी तरीके से संचालित हो रही है। संगठन का आरोप है कि बिना पर्याप्त जांच और नियंत्रण के दवाओं की ऑनलाइन आपूर्ति की जा रही है।

संघ के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में कई विसंगतियां हैं, जिन्हें दूर करने की जरूरत है। दवा विक्रेताओं का कहना है कि ई-फार्मेसी कंपनियां नियमों का पालन किए बिना बड़े पैमाने पर कारोबार कर रही हैं।

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जाले में मरीजों को हुई परेशानी

दरभंगा के जाले क्षेत्र में भी मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रहे। मुख्य बाजारों, चौक-चौराहों और ग्रामीण इलाकों की दवा दुकानें सुबह से बंद थीं। इससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

कई लोग जरूरी दवाओं के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान भटकते नजर आए। हालांकि अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर खुले रहने से गंभीर मरीजों को कुछ राहत मिली।

बिना प्रिस्क्रिप्शन दवा बिक्री पर सवाल

दवा कारोबारियों ने ऑनलाइन माध्यम से बिना वैध डॉक्टर प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की बिक्री पर गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर खतरा बढ़ सकता है।

संघ के प्रतिनिधियों के अनुसार, कई बार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऐसी दवाएं भी आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, जिनके लिए डॉक्टर की सलाह जरूरी होती है। इससे दवाओं के गलत इस्तेमाल और दुरुपयोग की आशंका बढ़ती है।

दवा विक्रेताओं ने यह भी कहा कि स्थानीय मेडिकल दुकानों पर फार्मासिस्ट की निगरानी में दवाएं दी जाती हैं, जबकि ऑनलाइन बिक्री में इस तरह की प्रत्यक्ष निगरानी नहीं होती।

सरकार से सख्त नियमों की मांग

केमिस्ट एसोसिएशन ने केंद्र और राज्य सरकार से ई-फार्मेसी कंपनियों के लिए सख्त नियम लागू करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो छोटे खुदरा दवा व्यवसायियों का कारोबार गंभीर संकट में पड़ जाएगा।

संघ के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

इस बीच प्रशासन ने पूरे मामले पर नजर बनाए रखी और विभिन्न जिलों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए।

पृष्ठभूमि

देशभर में दवा विक्रेता संगठन पिछले कई वर्षों से ऑनलाइन दवा बिक्री का विरोध करते रहे हैं। उनका तर्क है कि ई-फार्मेसी कंपनियों को लेकर स्पष्ट और सख्त नियमन अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है।

दूसरी ओर, ऑनलाइन दवा कंपनियां दावा करती हैं कि वे ग्राहकों को घर बैठे सुविधा, डिजिटल रिकॉर्ड और सस्ती कीमत पर दवाएं उपलब्ध करा रही हैं। हालांकि खुदरा दवा विक्रेता इसे अपने व्यवसाय के लिए सीधी चुनौती मानते हैं।


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