ट्रंप बोले- किंग चार्ल्स भी सहमत, ईरान को परमाणु हथियार नहीं

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ट्रंप का दावा: किंग चार्ल्स भी सहमतईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलना चाहिए

अमेरिकाइजराइल संघर्ष के बीच कूटनीति तेज, ईरान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी


वॉशिंगटन/लंदन, 29 अप्रैल (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया है कि ब्रिटेन के सम्राट King Charles III इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु बम हासिल नहीं करने दिया जाना चाहिए। ट्रंप ने यह टिप्पणी ब्रिटिश सम्राट की अमेरिका यात्रा के दौरान की, जिसकी जानकारी अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters ने दी है।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी तनाव 61वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जबकि युद्धविराम को 22 दिन हो चुके हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में अस्थिरता और कूटनीतिक गतिविधियां दोनों साथ-साथ जारी हैं।

संघर्ष और कूटनीति का समानांतर दौर

मौजूदा हालात में एक ओर जहां सैन्य गतिविधियां जारी हैं, वहीं दूसरी ओर बातचीत के प्रयास भी तेज हो गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान जल्द ही मध्यस्थों को एक संशोधित प्रस्ताव सौंप सकता है। बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव पाकिस्तान में मध्यस्थों को दिया जाएगा, जो उच्च स्तर की सलाह-मशविरा के बाद तैयार किया गया है।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियां भी इस बात का आकलन कर रही हैं कि यदि ट्रंप एकतरफा जीत की घोषणा करते हैं तो ईरान की प्रतिक्रिया क्या हो सकती है।

अमेरिका की नई रणनीति: लंबी नाकेबंदी

The Wall Street Journal की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने अपने सहयोगियों को ईरान पर दीर्घकालिक नाकेबंदी की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य ईरानी बंदरगाहों, तेल निर्यात और समुद्री मार्गों पर दबाव बढ़ाना है।

विशेष रूप से Strait of Hormuz से जुड़े प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल भंडारण की क्षमता लगभग भर चुकी है, जिससे उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है।

ट्रंप अब भी इस मांग पर अड़े हुए हैं कि ईरान कम से कम 20 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन (enrichment) को निलंबित करे।

प्रतिबंधों का दायरा बढ़ा

अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के 35 संस्थानों और व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। इन पर आरोप है कि वे ईरान के “शैडो बैंकिंग नेटवर्क” के जरिए वित्तीय गतिविधियां चला रहे थे।

बेसेंट के अनुसार, यह नेटवर्क ईरान की सैन्य क्षमताओं को आर्थिक सहायता प्रदान करता है और मध्य पूर्व में हिंसा को बढ़ावा देता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है, महंगाई बढ़ी है और मुद्रा कमजोर हुई है।

लेबनान और क्षेत्रीय तनाव

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, हालिया हमलों में कम से कम पांच लोगों की मौत हुई है, जिनमें तीन पैरामेडिक्स भी शामिल हैं जो मलबे के नीचे दब गए थे।

इजराइल ने युद्धविराम के बावजूद दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले और तोपखाने की कार्रवाई तेज कर दी है। इजराइल के रक्षा मंत्री Yisrael Katz ने कहा कि सेना को सुरक्षा क्षेत्र में “आतंकी ढांचे” को खत्म करने का निर्देश दिया गया है।

पृष्ठभूमि: परमाणु कार्यक्रम और विवाद

ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से वैश्विक चिंता का विषय रहा है। पश्चिमी देशों का आरोप है कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार विकसित करना चाहता है, जबकि ईरान इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि उसका कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

ट्रंप के ताजा बयान और कूटनीतिक गतिविधियां इस बात का संकेत देती हैं कि आने वाले समय में इस मुद्दे पर दबाव और बढ़ सकता है।

आगे क्या

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान नया प्रस्ताव पेश करता है, तो बातचीत का एक नया दौर शुरू हो सकता है। हालांकि, सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों के चलते हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि क्या कूटनीति इस संकट को शांत कर पाएगी या तनाव और बढ़ेगा।


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