कोयला मंत्रालय ने दिल्ली में सतही कोयला गैसीकरण परियोजनाओं पर रोड शो आयोजित किया

कोयला मंत्रालय ने दिल्ली में सतही कोयला गैसीकरण परियोजनाओं पर रोड शो आयोजित किया


नई दिल्ली, 29 मई (केएनएन) कोयला मंत्रालय ने सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने की योजना पर नई दिल्ली में एक रोड शो का आयोजन किया, जिसमें नीति समर्थन, निवेश के अवसरों और देश में कोयला गैसीकरण बुनियादी ढांचे के विस्तार पर चर्चा हुई।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, कोयला और खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, कोयला सचिव विक्रम देव दत्त, अतिरिक्त सचिव सनोज कुमार झा, साथ ही राज्य सरकार के प्रतिनिधि, उद्योग प्रतिभागी, वित्तीय संस्थान और प्रौद्योगिकी प्रदाता उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रेड्डी ने कहा कि सरकार ने कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए 8,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना शुरू की है और हाल ही में क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए 37,500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त वित्तीय सहायता पैकेज को मंजूरी दी है।

मंत्रालय के अनुसार, इस पहल से लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने और उर्वरक, मेथनॉल, हाइड्रोजन और पेट्रोकेमिकल जैसे क्षेत्रों में परियोजनाओं को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

रेड्डी ने कहा कि कोयला गैसीकरण से घरेलू औद्योगिक क्षमता और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करते हुए मेथनॉल, अमोनिया, उर्वरक और अन्य रसायनों के आयात पर भारत की निर्भरता को कम करने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने घरेलू औद्योगिक लचीलेपन के निर्माण के महत्व को बढ़ाने वाले कारकों के रूप में पश्चिम एशिया में अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला की बदलती गतिशीलता सहित वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक विकास का भी उल्लेख किया।

राज्य मंत्री दुबे ने कहा कि 37,500 करोड़ रुपये की योजना घरेलू कोयला संसाधनों के स्वच्छ उपयोग को बढ़ावा देगी और एलएनजी, मेथनॉल, अमोनिया, यूरिया, अमोनियम नाइट्रेट और कोकिंग कोल सहित उत्पादों पर आयात निर्भरता को कम करने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि यह पहल औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का समर्थन कर सकती है, खासकर कोयला-असर वाले क्षेत्रों में।

कोयला सचिव दत्त ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित कोयला गैसीकरण योजना से 2.5 लाख करोड़ रुपये से 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश जुटाने और लगभग 25 गैसीकरण परियोजनाओं के माध्यम से लगभग 50,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी इस्पात निर्माण के लिए सिंथेटिक प्राकृतिक गैस, यूरिया, मेथनॉल, अमोनिया, हाइड्रोजन और डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (डीआरआई) के उत्पादन का समर्थन कर सकती है।

दत्त ने यह भी कहा कि इस योजना को मील के पत्थर-आधारित निगरानी और कार्यान्वयन तंत्र को शामिल करते हुए परियोजना डेवलपर्स के लिए लचीलापन प्रदान करने के लिए एक प्रौद्योगिकी-अज्ञेयवादी ढांचे के साथ डिजाइन किया गया है।

वैश्विक ऊर्जा और वस्तु आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऊर्जा, रसायन, उर्वरक और इस्पात जैसे क्षेत्रों में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करना तेजी से महत्वपूर्ण हो गया है।

रोड शो में कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं के लिए परियोजना व्यवहार्यता, नीति प्रोत्साहन, प्रौद्योगिकी तत्परता और कार्यान्वयन मॉडल से संबंधित मुद्दों पर उद्योग के प्रतिनिधियों और निवेशकों के साथ बातचीत और सवाल-जवाब सत्र भी शामिल था।

कोयला मंत्रालय ने कहा कि यह पहल आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्यों का समर्थन करते हुए घरेलू कोयला संसाधनों के स्वच्छ और अधिक कुशल उपयोग को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

(केएनएन ब्यूरो)



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