KDSU का 456 करोड़ घाटे वाला बजट पास, कुलाधिपति ने सुधारों पर दिया जोर

KDSU-Darbhanga KDSU का 456 करोड़ घाटे वाला बजट पास, कुलाधिपति ने सुधारों पर दिया जोर

KDSU: दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय का 456.63 करोड़ का घाटे वाला बजट पास, वेतन पर बड़ा खर्च

सीनेट बैठक में वित्तीय संकट पर चर्चा, कुलाधिपति ने प्रशासनिक सुधार और स्वचालन पर दिया जोर

दरभंगा (न्यूज़ डेस्क): दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय (KDSU) की सीनेट ने बुधवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 456.63 करोड़ रुपये के घाटे वाले बजट को मंजूरी दे दी। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता राज्यपाल सह कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने की। बजट को लेकर विश्वविद्यालय की वित्तीय स्थिति और प्रशासनिक सुधारों पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में विश्वविद्यालय के वित्तीय सलाहकार इंद्र कुमार ने बजट प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए बताया कि आगामी वित्तीय वर्ष के लिए कुल अनुमानित व्यय 459.33 करोड़ रुपये है, जबकि अनुमानित आय मात्र 2.69 करोड़ रुपये है। इस अंतर के कारण 456.63 करोड़ रुपये का बड़ा घाटा सामने आया है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह घाटा 448.66 करोड़ रुपये था, यानी इस वर्ष घाटे में लगभग 8 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।

वित्तीय सलाहकार ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय के कुल खर्च का बड़ा हिस्सा वेतन मद में जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्नातकोत्तर विभागों और विभिन्न अंगीभूत कॉलेजों के शिक्षण कर्मचारियों के वेतन के लिए 19.67 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन और अन्य प्रशासनिक खर्च भी बजट पर भारी दबाव डाल रहे हैं।

सीनेट को संबोधित करते हुए कुलाधिपति सैयद अता हसनैन ने विश्वविद्यालयों में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लिया गया है और इनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने सदस्यों के सुझावों की सराहना करते हुए कहा कि वे स्वयं कुलपति और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यावहारिक समाधान तैयार करेंगे।

प्रशासनिक सुधारों पर जोर देते हुए कुलाधिपति ने विश्वविद्यालयों में स्वचालन (ऑटोमेशन) की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने समर्थ पोर्टल के प्रभावी उपयोग की बात करते हुए कहा कि इससे विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता आएगी। उनका कहना था कि तकनीक का उपयोग अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।

छात्रों की शैक्षणिक सुविधाओं का उल्लेख करते हुए हसनैन ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा जरूरी है। उन्होंने निर्देश दिया कि कक्षा शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। इसके लिए मजबूत और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

बैठक के दौरान कुलाधिपति ने कुलपति को निर्देश दिया कि सीनेट में उठाए गए सभी मुद्दों की विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर कुलाधिपति कार्यालय को भेजी जाए। उन्होंने कहा कि जो समस्याएं स्थानीय स्तर पर सुलझाई जा सकती हैं, उन्हें तुरंत हल किया जाए, जबकि जटिल मामलों पर उच्च स्तर पर विचार किया जाएगा।

इससे पहले दिन में कुलाधिपति ने ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के वाणिज्य और व्यवसाय प्रशासन विभाग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन का विषय “समसामयिक समय में बिजनेस रिसर्च” था, जिसमें देशभर के शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया।

मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में हसनैन ने कहा कि व्यवसाय अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत नेतृत्व, निरंतर प्रयास और आपसी सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने विषय को व्यापक और वर्तमान समय के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उनका कहना था कि बदलते आर्थिक परिदृश्य में शोध की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने बिहार की बौद्धिक क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आने वाले 5 से 10 वर्ष बिहार के विकास के लिए निर्णायक होंगे, बशर्ते उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग किया जाए।

सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कुलाधिपति ने कहा कि भारत को केवल आर्थिक विकास ही नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश देने पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि देश तपेदिक (टीबी) जैसी बीमारी को भी खत्म करने में सफल होगा, जैसे उसने कोविड-19 और पोलियो जैसी चुनौतियों पर विजय पाई है।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए प्लास्टिक के उपयोग से बचने की अपील भी की। उनके अनुसार, छोटे-छोटे प्रयासों से बड़े बदलाव संभव हैं और विश्वविद्यालयों को इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

केएसडीएसयू लंबे समय से वित्तीय दबाव का सामना कर रहा है। आय के सीमित स्रोत और बढ़ते खर्च, खासकर वेतन और प्रशासनिक मदों में, बजट असंतुलन का मुख्य कारण रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजस्व बढ़ाने के वैकल्पिक स्रोत विकसित नहीं किए गए, तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

अंत में…

सीनेट द्वारा घाटे के बजट को मंजूरी मिलना विश्वविद्यालय की मौजूदा वित्तीय चुनौतियों को दर्शाता है। हालांकि कुलाधिपति द्वारा सुधारों और स्वचालन पर दिया गया जोर संकेत देता है कि आने वाले समय में प्रशासनिक और संरचनात्मक बदलाव किए जा सकते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विश्वविद्यालय इन निर्देशों को किस तरह लागू करता है और वित्तीय संतुलन की दिशा में क्या कदम उठाता है।

# Kameshwar Singh Darbhanga Sanskrit University


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