ग्रीनिंग इंडियन एग्रोकेमिकल सेक्टर को 2030 तक 7 बिलियन अमरीकी डालर की जरूरत है
नई दिल्ली, 15 मई (केएनएन) जेएमके रिसर्च की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत के एग्रोकेमिकल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को एक हरे रंग के परिवर्तन के लिए तैयार किया गया है, जिसमें 2030 तक अक्षय ऊर्जा (आरई) क्षमता के 11 गीगावॉट तक की योजना को एकीकृत करने की योजना है। इस बदलाव के लिए 7 बिलियन अमरीकी डालर के अनुमानित निवेश की आवश्यकता होगी।
एग्रोकेमिकल्स, जिसमें उर्वरक, बायोस्टिमुलेंट्स और कीटनाशकों सहित, कच्चे माल और ऊर्जा दोनों के लिए जीवाश्म ईंधन पर उनकी भारी निर्भरता के कारण कठोर-से-एबेट माना जाता है।
रिपोर्ट से पता चलता है कि इस क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक उत्सर्जन उर्वरक उत्पादन, विशेष रूप से यूरिया से उपजा है। यद्यपि कीटनाशक प्रति यूनिट अधिक ऊर्जा-गहन होते हैं, लेकिन उनका समग्र प्रभाव कम उत्पादन संस्करणों के कारण छोटा होता है।
वर्तमान में, उद्योग द्वारा उपयोग की जाने वाली केवल 3 प्रतिशत बि...









