
कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगा साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। उन्होंने मां की सर्जरी और मामा के चेहलुम में शामिल होने के लिए राहत मांगी थी।
उमर खालिद को नहीं मिली अंतरिम जमानत, कड़कड़डूमा कोर्ट ने याचिका खारिज की
मामा के चेहलुम में शामिल होने और मां की देखभाल के लिए मांगी थी 15 दिन की राहत
नई दिल्ली, 20 मई (जग वाणी न्यूज़ डेस्क): दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी उमर खालिद को अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उनकी 15 दिनों की अंतरिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस बार पेश किए गए आधार राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
उमर खालिद ने अदालत से अपने दिवंगत मामा के चेहलुम में शामिल होने और अपनी बीमार मां की सर्जरी के दौरान देखभाल करने के लिए अंतरिम जमानत देने की मांग की थी। बचाव पक्ष की ओर से कहा गया कि परिवार में मां की देखभाल करने वाला कोई अन्य सक्षम सदस्य मौजूद नहीं है।
याचिका में कहा गया कि उमर खालिद परिवार के सबसे बड़े और इकलौते बेटे हैं। उनके परिवार में माता-पिता और पांच बहनें हैं। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि उनके 71 वर्षीय पिता मां की देखभाल करने की स्थिति में नहीं हैं, जबकि चार बहनें शादीशुदा हैं और अलग-अलग शहरों में रहती हैं। ऐसे में मां की सर्जरी से पहले और बाद में उनकी देखभाल करना जरूरी है।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि उमर खालिद को इससे पहले कई अवसरों पर अंतरिम जमानत मिल चुकी है और उन्होंने हर बार अदालत की शर्तों का पालन करते हुए तय समय पर सरेंडर किया। वकीलों ने अदालत के सामने यह तर्क भी रखा कि समान परिस्थितियों में सह-आरोपी तस्लीम अहमद, शिफा उर रहमान और अथर खान को भी अंतरिम जमानत दी जा चुकी है, इसलिए समानता के सिद्धांत के आधार पर उमर खालिद को भी राहत मिलनी चाहिए।
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। विशेष लोक अभियोजक ने अदालत में कहा कि आरोपी अदालत की नरमी का बार-बार फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पहले जिन परिस्थितियों में अंतरिम जमानत दी गई थी, वे इस मामले से अलग थीं।
सरकारी पक्ष ने कहा कि मामा का चेहलुम ऐसा आधार नहीं माना जा सकता, जिसके लिए अंतरिम जमानत दी जाए। अभियोजन ने तर्क दिया कि इस धार्मिक रस्म को परिवार के अन्य सदस्य भी पूरा कर सकते हैं। वहीं मां की सर्जरी को लेकर कहा गया कि यह कोई गंभीर ऑपरेशन नहीं है, बल्कि सामान्य प्रक्रिया है जिसमें लोकल एनेस्थीसिया दिया जाएगा।
अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि परिवार में अन्य सदस्य मौजूद हैं जो जरूरत पड़ने पर देखभाल कर सकते हैं। इसलिए आरोपी की व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक नहीं है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह तथ्य सही है कि पहले उमर खालिद और अन्य सह-आरोपियों को अंतरिम जमानत दी गई थी और उन्होंने शर्तों का उल्लंघन नहीं किया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर बार अंतरिम जमानत की मांग स्वीकार कर ली जाए।
कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक नई याचिका का मूल्यांकन उसके तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए। अदालत ने माना कि इस बार प्रस्तुत किए गए कारण अंतरिम राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उमर खालिद ने दो आधारों पर राहत मांगी थी — पहला, अपने मामा के चेहलुम में शामिल होना और दूसरा, मां की सर्जरी के दौरान उनकी देखभाल करना। लेकिन रिकॉर्ड और परिस्थितियों का अध्ययन करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि इन आधारों पर अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती।
गौरतलब है कि उमर खालिद फरवरी 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में यूएपीए समेत कई धाराओं के तहत आरोपी हैं और लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले में कई आरोपियों की ओर से समय-समय पर नियमित और अंतरिम जमानत याचिकाएं दायर की जाती रही हैं।
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