नई दिल्ली, 1 जनवरी (केएनएन) वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने अपने तीन महीने लंबे राष्ट्रव्यापी अभियान, ‘आपका पैसा, आपका अधिकार’ को सफलतापूर्वक संपन्न किया, जिसका उद्देश्य नागरिकों को उनकी लावारिस वित्तीय संपत्तियों का पता लगाने और दावा करने में सक्षम बनाना था।
अभियान में लावारिस बैंक जमा, बीमा आय, म्यूचुअल फंड, लाभांश और शेयर शामिल थे। इस पहल का उद्घाटन वित्त मंत्री ने 4 अक्टूबर, 2025 को गांधीनगर, गुजरात में किया था।
वित्तीय समावेशन के लिए अंत्योदय-केंद्रित आउटरीच
अभियान यह सुनिश्चित करने पर केंद्रित था कि वित्तीय प्रणाली का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचे। इसने 3ए फ्रेमवर्क, जागरूकता, पहुंच और कार्रवाई पर आधारित एक संरचित दृष्टिकोण के माध्यम से नागरिकों को उनके अधिकार वाली संपत्तियों को पुनः प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाने की मांग की।
प्रधान मंत्री ने नागरिकों और सरकार के बीच विश्वास को गहरा करने में ऐसी पहलों के महत्व को रेखांकित किया, वित्तीय प्रणाली में विश्वास को मजबूत करने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रव्यापी शिविर और व्यापक सार्वजनिक आउटरीच
अभियान के दौरान देशभर के 748 जिलों में चरणबद्ध एवं समन्वित तरीके से शिविर आयोजित किये गये। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के माध्यम से व्यापक पहुंच ने दावा-निपटान प्रक्रिया के बारे में सार्वजनिक जागरूकता और समझ को काफी हद तक बढ़ाया है।
मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी), अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) और प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में जागरूकता सामग्री प्रसारित की गई। पहुंच को अधिकतम करने के लिए लघु दृश्य-श्रव्य संदेश भी व्यापक रूप से साझा किए गए।
अंतर-नियामक समन्वय और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म
अभियान की एक प्रमुख ताकत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई), पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए), और निवेशक शिक्षा और संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) सहित प्रमुख वित्तीय क्षेत्र के नियामकों के बीच घनिष्ठ समन्वय था।
लावारिस बैंक जमा के लिए आरबीआई के यूडीजीएएम, लावारिस बीमा आय के लिए आईआरडीएआई के बीमा भरोसा और लावारिस म्यूचुअल फंड निवेश के लिए सेबी के मित्रा जैसे मौजूदा डिजिटल प्लेटफॉर्म का नागरिकों को उनकी संपत्ति की पहचान करने और दावा करने में मदद करने के लिए प्रभावी ढंग से लाभ उठाया गया था।
राज्य स्तरीय संस्थाओं एवं अधिकारियों की भूमिका
राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (एसएलबीसी), राज्य स्तरीय बीमा समितियों (एसएलआईसी), अग्रणी जिला प्रबंधकों (एलडीएम) और अन्य हितधारकों ने अभियान को जमीन पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिविरों में जन प्रतिनिधियों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और क्षेत्रीय पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी देखी गई।
4,200 करोड़ रुपये सही मालिकों को लौटाए गए
अभियान के प्रत्यक्ष परिणाम और हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग के रूप में, लगभग 4,200 करोड़ रुपये की लावारिस वित्तीय संपत्ति उनके असली मालिकों को वापस कर दी गई।
(केएनएन ब्यूरो)

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