
नई दिल्ली, 30 मार्च (केएनएन) सरकार ने व्यापार को सुविधाजनक बनाने और व्यापार करने में आसानी में सुधार लाने के उद्देश्य से कूरियर सेवाओं के माध्यम से निर्यात के लिए प्रति-कंसाइनमेंट मूल्य सीमा हटा दी है।
इससे पहले, कूरियर निर्यात की सीमा 10 लाख रुपये प्रति खेप थी। संशोधन इस सीमा को पूरी तरह से हटा देता है, सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 और आईटीसी (एचएस) निर्यात नीति के तहत लागू नियमों के अधीन, पंजीकृत कूरियर सेवाओं के माध्यम से किसी भी मूल्य के शिपमेंट की अनुमति देता है।
नया प्रावधान 1 अप्रैल, 2026 से लागू होगा, जिसके बाद मौजूदा मूल्य सीमा वापस ले ली जाएगी।
इस कदम से शिपमेंट आकार में अधिक लचीलापन प्रदान करके निर्यातकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), ई-कॉमर्स फर्मों और छोटे व्यवसायों को लाभ होने की उम्मीद है।
इससे लॉजिस्टिक्स को आसान बनाने, निर्यात प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और कूरियर चैनलों के माध्यम से उच्च निर्यात मात्रा का समर्थन करने की भी संभावना है।
एमएसएमई के राष्ट्रीय निकाय फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (एफआईएसएमई) ने इस कदम को स्वीकार कर लिया है, क्योंकि उसने पहले अपनी बजट सिफारिशों में इस बारे में चिंता जताई थी।
संशोधन को विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा 27 मार्च, 2026 की अधिसूचना संख्या 67/2025-26 के तहत अधिसूचित किया गया था।
विदेश व्यापार नीति 2023 के पैरा 9.05 में संशोधन किया गया है, जो कूरियर सेवाओं और डाकघरों के माध्यम से निर्यात को नियंत्रित करता है।
(केएनएन ब्यूरो)

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