कमजोर मानसून और वैश्विक अस्थिरता ने विकास और मुद्रास्फीति पर चिंता बढ़ा दी है
नई दिल्ली, 20 जून (केएनएन) भारत पश्चिम एशिया तनाव और उभरते घरेलू मौसम जोखिमों से जुड़ी बाहरी वस्तु अस्थिरता से प्रेरित दोहरी आर्थिक चुनौती की ओर बढ़ रहा है, क्योंकि असमान दक्षिण-पश्चिम मानसून ग्रामीण मांग और मुद्रास्फीति पर चिंता पैदा करता है।
असमान मानसून मौसम-आधारित आर्थिक चिंताओं को बढ़ाता है
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून दक्षिणी महाराष्ट्र में रुक गया है, जिससे 4 जून से 18 जून के बीच 41 प्रतिशत वर्षा की कमी हुई है।
देश में सामान्य 72.2 मिमी के मुकाबले 42.6 मिमी बारिश हुई। आईएमडी ने 2026 के लिए लंबी अवधि के औसत (एलपीए) के 90 प्रतिशत पर मानसून वर्षा का भी अनुमान लगाया है, जो अगर साकार होता है, तो तीन वर्षों में भारत का पहला सामान्य से कम मानसून होगा और 2015 के बाद से सबसे कमजोर पूर्वानुमान होगा।
वैश्विक और घरेलू कारकों से द...









